नवीन गोगना
लुधियाना, 2 मार्च /यूटर्न :
ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की कथित हवाई हमले में मौत की खबर के बाद भारत के कई राज्यों में विरोध प्रदर्शन और शोक सभाएं आयोजित की गईं। कश्मीर घाटी में सोमवार को प्रशासन ने एहतियातन कई इलाकों में लोगों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगा दिए। अधिकारियों के अनुसार, श्रीनगर के लाल चौक स्थित घंटाघर को चारों ओर से बैरिकेड लगाकर बंद कर दिया गया है तथा पूरे शहर में पुलिस और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों की भारी तैनाती की गई है, ताकि प्रदर्शनकारियों को एकत्र होने से रोका जा सके।
अधिकारियों ने बताया कि घाटी में लगभग 15 लाख शिया आबादी है। लाल चौक, सैदा कदल, बडगाम, बांदीपोरा, अनंतनाग और पुलवामा सहित कई क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए। प्रदर्शनकारियों को मातम मनाते और अमेरिका व इजराइल विरोधी नारे लगाते देखा गया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए प्रमुख चौराहों पर कंटीले तार और अवरोधक लगाए गए हैं। छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए निजी स्कूलों सहित सभी शैक्षणिक संस्थान दो दिन के लिए बंद कर दिए गए हैं।
ये पाबंदियां मुत्तहिदा मजलिस-ए-उलेमा (एमएमयू) के अध्यक्ष मीरवाइज उमर फारूक द्वारा एक दिवसीय बंद के आह्वान के बाद लागू की गईं। मीरवाइज ने लोगों से शांति और गरिमा बनाए रखने की अपील की। पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती समेत कई राजनीतिक दलों ने भी बंद का समर्थन किया है।
पंजाब के मलेरकोटला और लुधियाना में भी विरोध प्रदर्शन हुए। लुधियाना की जामा मस्जिद के बाहर बड़ी संख्या में लोग एकत्र हुए और इजराइल सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने इजराइल के प्रधानमंत्री का पुतला फूंका। दोपहर की नमाज के बाद खामेनेई की याद में विशेष दुआ की गई। इस मौके पर पंजाब के शाही इमाम मौलाना मोहम्मद उस्मान रहमानी लुधियानवी ने घटना की कड़ी निंदा करते हुए केंद्र सरकार से संयुक्त राष्ट्र में विरोध दर्ज कराने और राष्ट्रीय शोक घोषित करने की मांग की।
अजमेर में शिया समुदाय ने तीन दिन के शोक की घोषणा की है। बिहार, झारखंड, तेलंगाना और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में भी प्रदर्शन और स्वैच्छिक बंद की खबरें हैं। प्रशासन ने सभी जगह शांति बनाए रखने की अपील की है और कहा है कि स्थिति पर कड़ी नजर रखी जा रही है।