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सत्तधारी और विपक्षी राजनेताओं पर गिर सहती है गाज , प्रेजिडेंट पर टिकी निगाहें
लुधियाना 12 मार्च : सरकारी सतलुज क्लब में जाली शिक्षा डिग्री एवं अन्य दस्तावेजों के आधार पर मैंबरशिप लेने वाला का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। हालाँकि हर दो वर्ष बाद मैनेजिंग कमेटी के चयन हेतु होने वाले चुनावों के कारण सतलुज क्लब वैसे ही विवादों में बना रहता है। ऐसे में चर्चाओं अनुसार क्लब की मैनेजमेंट कमेटी को किसी व्यक्ति द्वारा ईमेल के जरिए कुछ मैंबरों द्वारा जाली एवं फोर्ज्ड डिग्री के आधार पर मैमब्र शिप लेने की गुप्त जानकारी दी। जिसकी आंतरिक जाँच में कई मैम्बरों के केस में गुप्त सूचना सही पाई गई। जिसकी जानकारी सभी मैंबरों में आग से भी तेज फैलती नजर आई। वही जानकारों की माने तो जाली डिग्री की आग केवल एका दुका मैंबरों तक ही नहीं बल्कि राजनितिक गलियारे को भी छूती नजर आ रही है। चर्चा है की क्लब की मैंबरशिप का आनंद ले रहे कई राजनेता भी इससे अपना दामन नहीं बचा सकेंगे। अब देखना होगा की यह नियम आम कारोबारी मैमब्र एवं राजनेता मैमब्र के लिए एक सामान रहेंगे या मौके अनुसार किया जाएगा सभी की नजरें क्लब के प्रेजिडेंट एवं डीसी हिमांशु जैन पर टिकी है क्योकि आखिरी फैंसला उन्ही का होगा। आप का क्या होगा जनाब-ए-आली ? क्लब के सविधान की माने तो किसी भी मैमब्र को ग्रेजुएट होना अनिवार्य है। ऐसे में कई सत्ताधारी और विपक्षी राजनेता भी क्लब के महत्वपूर्ण मैंबर बताए जा रहे है जिनकी सरकारी प्लेटफॉर्म पर एजुकेशन सार्वजनिक तौर पर आठवीं एवं दसवीं पास बताई जा रही है ऐसे में क्लब के मैंबर एक दूसरे पर कॉर्ड वर्ल्ड में तंज कस्ते नजर आ रहे है की आप का क्या होगा " जनाब-ए-आली " क्या उनपर भी कार्यवाही एवं सदस्य्ता रद्द होगी ? क्या कहता है कन्सिट्यूशन अर्थात नियम ? महिला एवं पुरुष दोनों के लिए क्लब की सदस्यता के लिए 25 वर्ष से अधिक आयु और न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता ग्रेजुएट हो या जिन्होंने उच्च माध्यमिक/प्लस-टू के बाद किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से किसी भी विषय में तीन वर्ष का कोर्स किया हो ? बहुत कठिन है डगर पनघट की : प्रेजिडेंट पर टिकी आँखे । सतलुज क्लब जोकि एक सरकारी क्लब है के सविधान अनुसार महानगर का वर्तमान डीसी ही क्लब का प्रेजिडेंट है अब जाली डिग्री के आधार पर मैमब्रशिप का मामला अंतिम फैंसले के लिए डीसी के पास आरक्षित है। बुद्धिजीवियों की माने तो मामले में फैंसला बहुत कठिन है डगर पनघट की कहावत जैसा है क्योकि अगर शिक्षा की बात है तो कई राजनेता मैम्बरों की शिक्षा भी ग्रैजुएशन से कम है। क्या अकेले मैमब्र ही दोषी ? जाली डिग्री मामले में बुद्धिजीवियों में तर्क जारी है। मैम्बरों का मन्ना है की क्या अकेला मैंबर ही दोषी है उस समय की मैनेजिंग कमेटी की मैंबरों पर भी जाँच एवं कार्यवाही होनी चाहिए और जानबूझ कर सच छिपाने वालों को भी जाँच की राडार में लेना चाहिए।