रयात बाहरा ग्रुप के चेयरमैन/चांसलर गुरविंदर सिंह बाहडा ने विशेष बातचीत में शिक्षा क्षेत्र में अपने लंबे सफर और भविष्य की योजनाओं पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि वर्ष 2000 के आसपास रोपड़ से शुरू हुई यात्रा आज विभिन्न कैंपसों और विश्वविद्यालयों तक पहुंच चुकी है। होशियारपुर में 2008 में कैंपस शुरू करने के बाद रोजगारपरक पाठ्यक्रमों पर जोर दिया गया। ग्रुप अब आधुनिक तकनीक, कौशल विकास और क्लाउड यूनिवर्सिटी के माध्यम से दूर-दराज के विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने की दिशा में काम कर रहा है।
होशियारपुर (दलजीत अजनोहा) : रयात बाहरा ग्रुप के चेयरमैन/चांसलर गुरविंदर सिंह बाहडा की ओर से वरिष्ठ संवाददाता दलजीत अजनोहा के साथ विशेष बातचीत की। जिस दौरान उन्होंने शिक्षा के क्षेत्र में अपने लंबे सफर, संस्थानों की स्थापना तथा भविष्य की योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी साझा की।गुरविंदर सिंह बाहडा
ने बताया कि उन्होंने वर्ष 2000 के आसपास शिक्षा के क्षेत्र में अपनी यात्रा शुरू की और सबसे पहला कैंपस रोपड़ में स्थापित किया। इसके बाद खरड़ और मोहाली सहित विभिन्न स्थानों पर कैंपस खोले गए। बाद में खरड़-मोहाली में रयात बाहडा यूनिवर्सिटी की स्थापना की गई।उन्होंने कहा कि उनका संबंध होशियारपुर जिले से है और उनके मन में लंबे समय से इस क्षेत्र में शिक्षा के क्षेत्र में कुछ विशेष करने की इच्छा थी। इसी सोच के तहत वर्ष 2008 में होशियारपुर में रयात बाहडा कैंपस की शुरुआत की गई।उन्होंने बताया कि शुरुआती दौर में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा। उस समय शिक्षा का पारंपरिक स्वरूप तेजी से बदल रहा था तथा तकनीकी और प्रोफेशनल शिक्षा की मांग बढ़ रही थी। होशियारपुर क्षेत्र में विशेष रूप से यह आवश्यकता महसूस की जा रही थी कि लड़कियों के लिए ऐसा सुरक्षित और बेहतर संस्थान हो, जहां वे इंजीनियरिंग तथा अन्य प्रोफेशनल कोर्स कर सकें।इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए रयात बाहडा ग्रुप की ओर से लड़कियों के लिए विशेष इंजीनियरिंग कॉलेज शुरू किया गया, जिसे बड़ी सफलता मिली। उन्होंने कहा कि इस सफलता से संस्थान को शिक्षा के क्षेत्र में और आगे बढ़ने का प्रोत्साहन मिला।
गुरविंदर सिंह बाहडाने बताया कि शुरुआत में होशियारपुर कैंपस एक एफिलिएटेड कैंपस था, जिसके कारण सीटों, पाठ्यक्रम और सिलेबस को लेकर कई सीमाएं थीं। विद्यार्थियों को वर्तमान समय की जरूरतों के अनुसार नए और रोजगारपरक कोर्स उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से यूनिवर्सिटी स्थापित करने की आवश्यकता महसूस हुई। इसी सोच के साथ होशियारपुर में रयात बाहडायूनिवर्सिटी की स्थापना की गई।उन्होंने कहा कि यूनिवर्सिटी में ऐसे नए और आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू किए जा रहे हैं, जो विद्यार्थियों को वर्तमान समय की आवश्यकताओं के अनुसार शिक्षा प्रदान करने के साथ-साथ रोजगार के योग्य बनाने में मददगार हैं। गुरविंदर सिंह बाहडा ने यह भी बताया कि रयात बाहडा ग्रुप ने अपने विभिन्न कैंपसों के साथ-साथ स्कूल शिक्षा पर भी विशेष ध्यान दिया है। उद्देश्य यह है कि विद्यार्थियों को प्रारंभिक शिक्षा से ही उच्च शिक्षा, कौशल विकास और रोजगारपरक क्षेत्रों के लिए उचित मार्गदर्शन मिल सके। इसी उद्देश्य से होशियारपुर में भी स्कूल शुरू किया गया।उन्होंने बताया कि वर्तमान में रयात बाहडा ग्रुप की ओर से बाहडा यूनिवर्सिटी, शिमला, खरड़ स्थित रयात बाहडा यूनिवर्सिटी तथा अन्य शिक्षण संस्थानों के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में सेवाएं प्रदान की जा रही हैं। इसके अतिरिक्त दूर-दराज के विद्यार्थियों तक शिक्षा पहुंचाने के लिए क्लाउड यूनिवर्सिटी के नए प्रयास की दिशा में भी काम किया जा रहा है। इसके माध्यम से विद्यार्थी डिस्टेंस एजुकेशन और आधुनिक तकनीक के माध्यम से शिक्षा प्राप्त कर सकेंगे।गुरविंदर सिंह बाहडा ने कहा कि रयात बाहडाग्रुप का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों को समय के अनुरूप गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, आधुनिक तकनीक, कौशल और रोजगार के अवसरों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि ग्रुप भविष्य में भी शिक्षा के क्षेत्र में नए प्रयास करता रहेगा और विद्यार्थियों के उज्ज्वल भविष्य के लिए निरंतर कार्य करेगा।