सुप्रीम कोर्ट ने Surya Kant की अध्यक्षता में PM CARES Fund को Right to Information Act के दायरे में लाने वाली PIL खारिज की। लुधियाना के व्यापारी ने अदालत में माना कि याचिका उसने वकील के बिना AI टूल्स की मदद से तैयार की थी, कोर्ट ने इसे गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए चेतावनी दी।
नई दिल्ली 11 March । सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को एक दिलचस्प लेकिन तीखी सुनवाई देखने को मिली, जब मुख्य न्यायाधीश Surya Kant ने लुधियाना के एक छोटे कपड़ा व्यापारी द्वारा दायर जनहित याचिका (PIL) पर कड़ा रुख अपनाया। याचिका में PM CARES Fund को Right to Information Act के दायरे में लाने की मांग की गई थी।
मुख्य न्यायाधीश कांत की अध्यक्षता वाली पीठ, जिसमें न्यायमूर्ति **Joymalya Bagchi** और **R Mahadevan** भी शामिल थे, ने याचिकाकर्ता Jaswinder Singh Sidhu से पूछा कि इतनी जटिल कानूनी भाषा वाली याचिका किसने तैयार की। लुधियाना के इस व्यापारी ने बताया कि वह 12वीं तक पढ़ा है और होजरी का छोटा कारोबार चलाता है। उसने पिछले वर्ष लगभग 5.25 लाख रुपये आयकर देने की बात भी बताई।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि यदि याचिकाकर्ता 30 प्रतिशत भी सवालों के जवाब दे देता है तो वे मान लेंगे कि याचिका उसी ने लिखी है। जब उनसे याचिका में लिखे “फिड्यूशियरी रिस्क ऑफ कॉर्पोरेट डोनर्स” जैसे शब्दों का अर्थ पूछा गया तो वह जवाब नहीं दे सके।
बाद में व्यापारी ने स्वीकार किया कि उसने याचिका खुद लिखी, लेकिन इसमें तीन-चार **AI टूल्स** की मदद ली क्योंकि वह वकील की फीस नहीं दे सकता था। उसने बताया कि एक टाइपिस्ट “मिस्टर दास” ने दस्तावेज़ को फॉर्मेट करने में मदद की, जिसके बदले उसने उसे चार जैकेट भी उपहार में दिए।
सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को “गैर-जिम्मेदाराना, अस्पष्ट और निराधार आरोपों से भरी” बताते हुए खारिज कर दिया। साथ ही टाइपिस्ट को भी अदालत में पेश होने के निर्देश दिए गए। सुनवाई के अंत में मुख्य न्यायाधीश ने व्यापारी को सलाह दी कि वह अपने कारोबार पर ध्यान दे और भविष्य में ऐसे मामलों में सावधानी बरते।