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चंडीगढ़/यूटर्न/ 16 मार्च। नगर निगम, चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड और क्रेस्ट के खातों से जुड़े करोड़ों रुपये के घोटाले में गिरफ्तार रियल एस्टेट इन्वेस्टर विक्रम वधवा से पुलिस की पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि उसकी गिरफ्तारी के बाद इस पूरे मामले में कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। जांच में सामने आया है कि आईडीएफसी फर्स्ट बैंक के तत्कालीन मैनेजर ऋभव ऋषि ने कथित तौर पर सरकारी विभागों के खातों में जमा करोड़ों रुपये की जानकारी वधवा को दी थी। आरोप है कि दोनों ने मिलकर इन खातों से रकम निकालने और शेल कंपनियों के जरिए दूसरे खातों में ट्रांसफर करने की योजना बनाई। पुलिस के मुताबिक इस नेटवर्क में कैपको फिनटेक सर्विसेज, आरएस ट्रेडर्स और स्वास्तिक देश प्रोजेक्ट्स जैसी कंपनियों का इस्तेमाल किया गया। इन कंपनियों के खातों के माध्यम से करोड़ों रुपये घुमाकर बाद में रियल एस्टेट कारोबार में लगाया गया। जांच के दौरान एक और बड़ा खुलासा हुआ है। चंडीगढ़ स्मार्ट सिटी लिमिटेड के रिकॉर्ड में करीब 116.84 करोड़ रुपये के 11 फिक्स्ड डिपॉजिट रसीद (एफडीआर) दर्ज हैं, लेकिन बैंक के सिस्टम में इनका कोई रिकॉर्ड नहीं मिला। आरोप है कि ये एफडीआर मार्च-अप्रैल 2025 में कथित तौर पर तत्कालीन बैंक मैनेजर ऋभव ऋषि द्वारा जारी किए गए थे। इसके अलावा बैंक स्टेटमेंट की जांच में 8.22 करोड़ रुपये के तीन संदिग्ध ट्रांजैक्शन भी सामने आए हैं, जिनका निगम के रिकॉर्ड में कोई हिसाब नहीं मिला। पुलिस इन लेनदेन की भी गहन जांच कर रही है। जांच एजेंसियों को शक है कि सरकारी खातों से निकाली गई रकम को पिछले तीन-चार वर्षों में चंडीगढ़, मोहाली, खरड़ और आसपास के इलाकों में शुरू किए गए कई आवासीय और व्यावसायिक प्रोजेक्ट्स में लगाया गया। फिलहाल पुलिस पूरे पैसे के ट्रेल, संपत्तियों और इस नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है।