Uturn Time
Breaking
Mohali: Sohana में 18 दिन का गुरमत-गतका कैंप, सिख विरासत से जुड़ रहे युवा Gurugram: अवैध लिंग जांच पर सख्ती, गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग ने यूपी में गिरोह दबोचा Kaithal: ‘प्यारी बेटी’ मुहिम से बेटियों को मिलेगी नई पहचान और प्रेरणा: सीईओ सुरेश राविश New Delhi: जीडीपी आंकड़ों में सुधार, भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की दर से बढ़ने की उम्मीद Hushiarpur: होशियारपुर फोटोग्राफर एसोसिएशन की अहम बैठक हुई Mumbai: शेख फाउंडेशन की ओर से ईद-उल-अजहा डिनर दावत का भव्य आयोजन, मुंबई की नामचीन हस्तियों ने की शिरकत Hushiarpur: देश में ED और CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिकरण किया जा रहा है: प्रणव कृपाल Hushiarpur: ज़िला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र हुशियारपुर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Hoshiarpur: बीबीएमबी तलवाड़ा में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Kalayat: कलायत के मनखुश ने JEE Advanced में गाड़े सफलता के झंडे, हासिल किया ऑल इंडिया 1000वां रैंक नौकरी के लिए धरना दे रहे लोगों पर लाठीचार्ज, 10 हिरासत में लिए Kurukshetra: भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण व सनातन संस्कृति का वह अनमोल उपहार है योग: नायब सिंह सैनी
Logo
Uturn Time
चंडीगढ़/यूटर्न/ 2अप्रैल। पूर्व सैनिकों की स्वास्थ्य योजना ECHS में कथित बड़े घोटाले को लेकर केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने वीरवार को ट्राईसिटी में व्यापक कार्रवाई करते हुए 9 निजी अस्पतालों और उनसे जुड़े ठिकानों पर छापेमारी की। शुरुआती जांच में 100 करोड़ रुपये से अधिक के फर्जी क्लेम का मामला सामने आया है, जिससे स्वास्थ्य तंत्र में हड़कंप मच गया है। सूत्रों के मुताबिक, जांच एजेंसी ने सेक्टर-38 समेत चंडीगढ़, मोहाली और पंचकूला के कई अस्पतालों व मेडिकल सेंटरों को निशाने पर लिया। जिन संस्थानों पर कार्रवाई हुई, उनमें धर्म, केयर, एडन और अमर अस्पताल सहित कुछ अन्य निजी केंद्र शामिल हैं। छापेमारी के दौरान दस्तावेज, कंप्यूटर रिकॉर्ड और बिलिंग से जुड़ा अहम डेटा जब्त किया गया है। फर्जी एडमिशन और बनावटी इलाज का खेल जांच में खुलासा हुआ है कि ECHS योजना के तहत मरीजों को बिना वास्तविक जरूरत के अस्पताल में भर्ती दिखाया जाता था। कई मामलों में मरीज केवल ओपीडी में आए, लेकिन रिकॉर्ड में उन्हें कई दिनों तक भर्ती दर्शाकर मोटे बिल बना दिए गए। यहां तक कि बिना ऑपरेशन किए सर्जरी दिखाने और महंगी दवाइयों के फर्जी बिल जोड़ने के भी आरोप सामने आए हैं। डॉक्टर, लैब और एजेंसियों की मिलीभगत CBI को शक है कि इस पूरे रैकेट में निजी अस्पतालों के डॉक्टर, डायग्नोस्टिक लैब और एक प्राइवेट एजेंसी की मिलीभगत थी। यह एजेंसी कथित तौर पर अस्पतालों को ECHS के तहत पंजीकृत मरीज उपलब्ध कराती थी, जिसके बाद फर्जी दस्तावेजों के आधार पर क्लेम तैयार किए जाते थे। महंगे इलाज के नाम पर लाखों की वसूली प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एक-एक केस में 5 से 10 लाख रुपये तक के बिल तैयार किए गए। कई फाइलों में फर्जी टेस्ट रिपोर्ट, दवाइयों के बिल और मेडिकल रिकॉर्ड जोड़कर क्लेम पास करवाए गए। भुगतान मिलने के बाद रकम को आपस में बांटने का भी संदेह है। जांच का दायरा बढ़ने के संकेत CBI अधिकारियों का कहना है कि यह मामला संगठित तरीके से चलाए जा रहे फर्जीवाड़े का हिस्सा लगता है। जब्त दस्तावेजों की जांच के बाद और भी अस्पतालों, डॉक्टरों व एजेंसियों की भूमिका सामने आ सकती है। आने वाले दिनों में इस मामले में और बड़े खुलासे होने की संभावना जताई जा रही है। इस कार्रवाई के बाद ट्राईसिटी के स्वास्थ्य क्षेत्र में हड़कंप है और कई निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो गए हैं।