Uturn Time
Breaking
Mohali: Sohana में 18 दिन का गुरमत-गतका कैंप, सिख विरासत से जुड़ रहे युवा Gurugram: अवैध लिंग जांच पर सख्ती, गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग ने यूपी में गिरोह दबोचा Kaithal: ‘प्यारी बेटी’ मुहिम से बेटियों को मिलेगी नई पहचान और प्रेरणा: सीईओ सुरेश राविश New Delhi: जीडीपी आंकड़ों में सुधार, भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की दर से बढ़ने की उम्मीद Hushiarpur: होशियारपुर फोटोग्राफर एसोसिएशन की अहम बैठक हुई Mumbai: शेख फाउंडेशन की ओर से ईद-उल-अजहा डिनर दावत का भव्य आयोजन, मुंबई की नामचीन हस्तियों ने की शिरकत Hushiarpur: देश में ED और CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिकरण किया जा रहा है: प्रणव कृपाल Hushiarpur: ज़िला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र हुशियारपुर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Hoshiarpur: बीबीएमबी तलवाड़ा में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Kalayat: कलायत के मनखुश ने JEE Advanced में गाड़े सफलता के झंडे, हासिल किया ऑल इंडिया 1000वां रैंक नौकरी के लिए धरना दे रहे लोगों पर लाठीचार्ज, 10 हिरासत में लिए Kurukshetra: भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण व सनातन संस्कृति का वह अनमोल उपहार है योग: नायब सिंह सैनी
Logo
Uturn Time
ज़िले के 21 गांवों में विधानसभा आरक्षण व्यवस्था को लेकर असंतोष और जनभावना खुलकर सामने आने लगी है। ग्रामीणों ने इसे “अधूरी आज़ादी” बताते हुए आगामी परिसीमन में निष्पक्ष पुनर्मूल्यांकन की मांग उठाई है। डॉ. नवीन नैन भालसी ने कहा कि 1947 में देश आज़ाद हुआ और 1966 में हरियाणा अलग राज्य बना, लेकिन पानीपत के कई गांव आज भी बार-बार आरक्षित विधानसभा क्षेत्रों में शामिल होकर स्वयं को रिजर्वेशन की जकड़न में बंधा महसूस कर रहे हैं। पहले असन्ध (रिजर्व) और बाद में इसराना (रिजर्व) में शामिल किए जाने से इन गांवों में वर्षों से उपेक्षा और असमान प्रतिनिधित्व की भावना बनी हुई है। डॉ नवीन नैन भालसी ने कहा कि यह राजनीति नहीं, बल्कि जनहित, सामाजिक न्याय और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य का प्रश्न है। युवाओं में निराशा, मेहनतकश परिवारों में उपेक्षा और सामाजिक संतुलन पर असर अब जनचिंता का विषय बन चुका है। भालसी, मडलौडा, वैसर, वैसरी, लोहारी, उंटला, बोहली, सिठाना, खण्डरा, बाल-जट्टान, शेरा, धर्मगढ़, रेर कलां, थिराना, जोशी, माजरा, कवि, नारा, आदियाना, आसन और थर्मल सहित 21 गांवों के लोग एकजुट होकर सरकार और चुनाव आयोग से मांग कर रहे हैं । आगामी लोकसभा / विधानसभा परिसीमन में इन गांवों की स्थिति की निष्पक्ष समीक्षा की जाए। ग्रामीणों ने मांग रखी कि इन गांवों को वर्तमान आरक्षण व्यवस्था से बाहर रखने पर विचार किया जाए तथा जनसंख्या, भौगोलिक स्थिति और जनभावना के आधार पर न्यायपूर्ण पुनर्मूल्यांकन किया जाए। डॉ. नवीन नैन भालसी ने कहा— “देश आज़ाद है, हरियाणा आज़ाद है… अब इन गांवों को भी न्यायपूर्ण प्रतिनिधित्व की आज़ादी मिलनी चाहिए।” डॉ नवीन नैन भालसी व उक्त सभी ग्राम वासियों ने सरकार से आग्रह किया कि 21 गांवों की इस पुरानी मांग को गंभीरता से सुनते हुए समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जाएं।