Uturn Time
Breaking
Mohali: Sohana में 18 दिन का गुरमत-गतका कैंप, सिख विरासत से जुड़ रहे युवा Gurugram: अवैध लिंग जांच पर सख्ती, गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग ने यूपी में गिरोह दबोचा Kaithal: ‘प्यारी बेटी’ मुहिम से बेटियों को मिलेगी नई पहचान और प्रेरणा: सीईओ सुरेश राविश New Delhi: जीडीपी आंकड़ों में सुधार, भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की दर से बढ़ने की उम्मीद Hushiarpur: होशियारपुर फोटोग्राफर एसोसिएशन की अहम बैठक हुई Mumbai: शेख फाउंडेशन की ओर से ईद-उल-अजहा डिनर दावत का भव्य आयोजन, मुंबई की नामचीन हस्तियों ने की शिरकत Hushiarpur: देश में ED और CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिकरण किया जा रहा है: प्रणव कृपाल Hushiarpur: ज़िला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र हुशियारपुर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Hoshiarpur: बीबीएमबी तलवाड़ा में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Kalayat: कलायत के मनखुश ने JEE Advanced में गाड़े सफलता के झंडे, हासिल किया ऑल इंडिया 1000वां रैंक नौकरी के लिए धरना दे रहे लोगों पर लाठीचार्ज, 10 हिरासत में लिए Kurukshetra: भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण व सनातन संस्कृति का वह अनमोल उपहार है योग: नायब सिंह सैनी
Logo
Uturn Time
लुधियाना 13 Jan : ग्रेटर लुधियाना एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (गलाडा) एक बार फिर गंभीर आरोपों के घेरे में है। पखोवाल रोड निवासी एस.पी. सिंह ने आरोप लगाया है कि जाली डेथ सर्टिफिकेट के जरिए उनकी दिवंगत मां की करीब एक करोड़ रुपये कीमत की संपत्ति को गलत तरीके से ट्रांसफर करने की कोशिश की गई। हैरानी की बात यह है कि शिकायत के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई, जिससे गलाडा अधिकारियों की भूमिका पर सवाल खड़े हो गए हैं। एस.पी. सिंह के अनुसार, उनकी मां जसवंत कौर का निधन 10 अगस्त 2015 को डीएमसी अस्पताल में हुआ था, लेकिन गलाडा कार्यालय में उनके नाम दर्ज प्लॉट नंबर 1117, फेज-2, ढंढारी कला (250 गज) की ट्रांसफर फाइल चल रही थी। जांच में सामने आया कि फाइल के साथ वर्ष 2010 का जगराओं से जारी बताया गया एक डेथ सर्टिफिकेट लगाया गया है, जो पूरी तरह फर्जी है। सर्टिफिकेट में लगी फोटो किसी गुरविंदर सिंह की बताई जा रही है, पता भी जगराओं का दर्ज है और मृत्यु वर्ष भी गलत है। मामले को और गंभीर बनाता है यह तथ्य कि ऑनलाइन रिकॉर्ड में जसवंत कौर के नाम दो डेथ सर्टिफिकेट मौजूद हैं। गुरविंदर सिंह ने स्पष्ट किया कि उन्होंने कभी ऐसा कोई सर्टिफिकेट नहीं बनवाया और न ही वह जसवंत कौर को जानते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि आधार कार्ड का दुरुपयोग कर फर्जी एंट्री की गई है। जगराओं सेवा केंद्र के क्लर्क भल्ला ने भी सनसनीखेज खुलासा करते हुए कहा कि ऐसे करीब 25 जाली डेथ सर्टिफिकेट के मामले सामने आ चुके हैं। बावजूद इसके, न तो पुलिस को सूचित किया गया और न ही किसी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हुई। यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले निर्भय सिंह ने भी जाली डेथ सर्टिफिकेट के जरिए फ्लैट ट्रांसफर की शिकायत दी थी, लेकिन वह फाइल भी दबा दी गई। शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि गलाडा में भूमि माफिया और कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसे मामलों को जानबूझकर ठंडे बस्ते में डाला जाता है। जब इस पूरे मामले पर गलाडा के एस्टेट ऑफिसर डॉ. अमन गुप्ता से संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसा कोई मामला याद नहीं है, हालांकि शिकायत मिलने पर कानूनी कार्रवाई की बात कही। सवाल यह है— जब सबूत सामने हैं, तो कार्रवाई क्यों नहीं? क्या गलाडा जाली दस्तावेजों के सहारे करोड़ों की संपत्तियों की लूट का अड्डा बन चुका है?