Uturn Time
Breaking
Mohali: Sohana में 18 दिन का गुरमत-गतका कैंप, सिख विरासत से जुड़ रहे युवा Gurugram: अवैध लिंग जांच पर सख्ती, गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग ने यूपी में गिरोह दबोचा Kaithal: ‘प्यारी बेटी’ मुहिम से बेटियों को मिलेगी नई पहचान और प्रेरणा: सीईओ सुरेश राविश New Delhi: जीडीपी आंकड़ों में सुधार, भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की दर से बढ़ने की उम्मीद Hushiarpur: होशियारपुर फोटोग्राफर एसोसिएशन की अहम बैठक हुई Mumbai: शेख फाउंडेशन की ओर से ईद-उल-अजहा डिनर दावत का भव्य आयोजन, मुंबई की नामचीन हस्तियों ने की शिरकत Hushiarpur: देश में ED और CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिकरण किया जा रहा है: प्रणव कृपाल Hushiarpur: ज़िला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र हुशियारपुर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Hoshiarpur: बीबीएमबी तलवाड़ा में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Kalayat: कलायत के मनखुश ने JEE Advanced में गाड़े सफलता के झंडे, हासिल किया ऑल इंडिया 1000वां रैंक नौकरी के लिए धरना दे रहे लोगों पर लाठीचार्ज, 10 हिरासत में लिए Kurukshetra: भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण व सनातन संस्कृति का वह अनमोल उपहार है योग: नायब सिंह सैनी
Logo
Uturn Time
कमजोर मानसून के चलते बढ़ सकती हैं लोगों की परेशानियां
नई दिल्ली: इस साल देश में मानसून सामान्य से कमजोर रहने के आसार जताए जा रहे हैं, जिससे कई राज्यों में गर्मी और अधिक बढ़ सकती है। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार आने वाले दिनों में तापमान में बढ़ोतरी के साथ लू चलने की संभावना भी बनी हुई है। उत्तर भारत, मध्य भारत और पश्चिमी राज्यों के कई हिस्सों में तेज गर्म हवाएं लोगों की परेशानी बढ़ा सकती हैं। मौसम विभाग ने लोगों को दोपहर के समय अनावश्यक बाहर निकलने से बचने, पर्याप्त पानी पीने और स्वास्थ्य संबंधी सावधानियां बरतने की सलाह दी है। दिल्ली स्थित पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम रविचंद्रन और आईएमडी के महानिदेशक डॉ. मृत्युंजय महापात्रा ने आज यहां एक संवाददाता सम्मेलन में मौसम के पूर्वानुमानों को साझा किया। सचिव ने बताया कि जून से सितंबर 2026 के दौरान देश में कुल मानसूनी वर्षा दीर्घकालीन औसत (एलपीए) का लगभग 90 प्रतिशत रहने का अनुमान है। इस साल मानसून सामान्य से कमजोर रह सकता है। इसके अलावा, सामान्य से कम बारिश होने की संभावना सबसे अधिक यानी 84 प्रतिशत है जबकि 1971 से 2020 के आंकड़ों के आधार पर देश में मानसून के दौरान औसत वर्षा 87 सेंटीमीटर मानी जाती है। उन्होंने चेतावनी दी है कि कम वर्षा के कारण खेती, जल संकट और भीषण गर्मी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। रविचंद्रन के पूर्वानुसार देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से कम बारिश होने के आसार हैं। हालांकि उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत, पूर्वी प्रायद्वीपीय इलाकों और पूर्वी-मध्य भारत के कुछ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक बारिश होने का अनुमान है। सचिव के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना 46 प्रतिशत, मध्य भारत में सामान्य से कम बारिश की संभावना 43 प्रतिशत, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत में भी कम बारिश की संभावना 45 प्रतिशत, पूर्वोत्तर भारत में सामान्य और सामान्य से कम बारिश की संभावना, मानसून कोर जोन (एमसीजेड) में भी कम बारिश की संभावना अधिक है। इसके अलावा, जून 2026 में देशभर में औसत वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है। केवल उत्तर-पश्चिम भारत, उत्तर-पूर्व भारत और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में अच्छी बारिश की संभावना है। उन्होंने कहा कि कम बारिश का असर खेती, जलाशयों, बिजली उत्पादन और पेयजल आपूर्ति पर पड़ सकता है। इससे सूखे और गर्मी की स्थिति भी गंभीर हो सकती है। डॉ. रविचंद्रन ने कहा कि जून 2026 में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य से अधिक तापमान रहने का अनुमान है। इसके साथ ही कई राज्यों में लू के दिन भी बढ़ सकते हैं। उत्तर प्रदेश, हरियाणा, पंजाब, बिहार, ओडिशा, छत्तीसगढ़, गुजरात, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, तेलंगाना, हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु राज्यों में लू का खतरा ज्यादा है। हालांकि राजस्थान और झारखंड में सामान्य से कम लू पड़ने की संभावना है। उन्होंने बताया कि प्रशांत महासागर में अल नीनो की स्थिति विकसित होने के आसार हैं। आमतौर पर अल नीनो के कारण भारत में मानसून कमजोर पड़ता है। वहीं हिंद महासागर द्विध्रुव (आईओडी) फिलहाल तटस्थ स्थिति में बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर मानसून का असर खेती और जलस्तर पर भी पड़ सकता है। हालांकि, मौसम की स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और समय-समय पर अपडेट जारी किए जा रहे हैं।