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लुधियाना, 03 फरवरी : अमेरिका ने भारत से आयातित उत्पादों पर लागू अतिरिक्त टैरिफ को पहले के 50 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है। यह फैसला भारत-अमेरिका के नए व्यापार समझौते का हिस्सा है, जिसका ऐलान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने किया। भारत की ओर से भी कुछ व्यापारिक प्रतिबद्धताओं पर सहमति बनी है। इसे दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक सकारात्मक मोड़ माना जा रहा है। भारतीय निर्यातकों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा है कि इससे अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी। चावल, कपड़ा, चमड़ा, रत्न-आभूषण, समुद्री उत्पाद समेत कई प्रमुख सेगमेंट को फायदा मिलने की उम्मीद है। भारतीय चावल निर्यात संघ (IREF) के अनुसार अब 18 प्रतिशत टैक्स संरचना थाईलैंड और पाकिस्तान जैसे प्रतिस्पर्धी देशों के स्तर के करीब आ गई है, जिससे शिपमेंट वॉल्यूम बढ़ने की संभावना है। उद्योग विशेषज्ञों का मानना है कि इससे “Made in India” ब्रांड को मजबूती मिलेगी और ऑर्डर बुक्स में तेजी आएगी। हालांकि विशेषज्ञ यह भी कहते हैं कि 18 प्रतिशत टैक्स अभी भी अमेरिका की MFN दरों के अतिरिक्त है, इसलिए सरकार से मार्केट एक्सेस और सपोर्ट पॉलिसी पर लगातार संवाद जरूरी है। उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ेंगे : गौरव गुप्ता फोर्जिंग सेक्टर से आरएन गुप्ता एंड कंपनी के एमडी गौरव गुप्ता ने कहा, “पहले ऊंचे टैरिफ के कारण हमारे ऑटो और इंडस्ट्रियल पार्ट्स अमेरिकी बाजार में महंगे पड़ रहे थे। अब 18% टैरिफ से हमारी कीमतें प्रतिस्पर्धी होंगी और पुराने ग्राहक दोबारा ऑर्डर देंगे। इससे उत्पादन और रोजगार दोनों बढ़ेंगे।” चीन-ताइवान से बेहतर मुकाबला होगा : गिरीश गुप्ता पायनियर फास्टनर के गिरीश गुप्ता ने कहा, “बोल्ट, नट और स्क्रू जैसे उत्पादों में अब हमें चीन और ताइवान के मुकाबले बेहतर स्थिति मिलेगी। अमेरिकी खरीदारों से नई पूछताछ शुरू हो चुकी है और मार्केट शेयर बढ़ने की उम्मीद है।” ‘मेड इन इंडिया’ को मिलेगा बूस्ट : संजीव स्याल इंजीनियरिंग गुड्स में प्राइमा लुब्रिकेंट्स के संजीव स्याल ने कहा, “कम टैरिफ से ‘मेड इन इंडिया’ इंजीनियरिंग प्रोडक्ट्स की विश्वसनीयता बढ़ेगी और लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट मिलेंगे। पहले ऊंचे टैक्स के कारण उत्पादन धीमा था, अब निर्यात वॉल्यूम, फैक्ट्री उपयोग और मार्जिन में सुधार आएगा।” लुधियाना जैसे हब को बड़ा फायदा : गौरव सहगल हैंड टूल इंडस्ट्री से पाई टूल्स के एमडी गौरव सहगल ने कहा, “प्लायर, रिंच और अन्य टूल्स अब अमेरिकी बाजार में सस्ते और आकर्षक बनेंगे। इससे लुधियाना जैसे इंडस्ट्रियल हब को बड़ा फायदा मिलेगा, क्योंकि देश का करीब 80 प्रतिशत हैंड टूल और इंजीनियरिंग उत्पादन पंजाब में होता है।” रुके ऑर्डर्स को मिलेगी रफ्तार : तेजविंदर सिंह बिग बैन ग्रुप के चेयरमैन तेजविंदर सिंह ने कहा, “इस समय अमेरिका के साथ यह करार बेहद जरूरी था। इंडस्ट्री में जो ऑर्डर्स रुके हुए थे वे अब फिर से चल पड़ेंगे। इससे बाजार में तेजी आएगी और भारतीय निर्यात को नई रफ्तार मिलेगी।” गारमेंट निर्यातकों की स्थिति मजबूत होगी : सूरज सिंह टेक्सटाइल सेक्टर में उदय क्राफ्ट के सूरज सिंह ओस्टर ने कहा, “कम टैरिफ से भारतीय वस्त्र और गारमेंट निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी और उन्हें अमेरिकी बाजार में दोबारा प्रभावी ढंग से उभरने का मौका मिलेगा।” वहीं निटवियर क्लब के प्रधान दर्शन डाबर ने कहा, “यह फैसला लुधियाना के टेक्सटाइल सेक्टर के लिए नई संजीवनी साबित होगा। नए ऑर्डर्स से इंडस्ट्री को समय पर राहत मिलेगी। 18% टैरिफ से बांग्लादेश, पाकिस्तान और वियतनाम जैसे देशों के मुकाबले भारत को लगभग 2% लागत लाभ मिलेगा, जिससे निर्यात मांग में उछाल आएगा।”