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नवीन गोगना लुधियाना 3 फरबरी युटर्न : पंजाब पिछले एक दशक से गैंगवार, बदले और राजनीति की गिरफ्त में है। सुखा काहलवां, लॉरेंस बिश्नोई, जग्गू भगवानपुरिया और बंबीहा गैंग के बीच चली दुश्मनी ने पूरे राज्य को खून-खराबे के मैदान में बदल दिया है। पंजाब में अपराध का एक नया इतिहास लिखा जा रहा है। 2006 की गर्मियों में चंडीगढ़ की एक शांत दोपहर उस वक्त दहल उठी, जब दिनदहाड़े गोलियों की आवाज़ गूंजी। पंजाब के कुख्यात गैंगस्टर प्रभजिंदर सिंह उर्फ डिंपी की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई। यह हत्या एक ऐसी खूनी कड़ी की शुरुआत थी, जिसने पंजाब को अपराध की दलदल में धकेल दिया। डिंपी का हत्यारा रॉकी था, जो फाजिल्का का रहने वाला एक युवा गैंगस्टर था। दो साल बाद रॉकी ने आत्मसमर्पण कर दिया, लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं हुई। रॉकी की दोस्ती कभी जैपाल भुल्लर, विक्की गौंडर और शेरा खुब्बण जैसे गैंगस्टरों से थी, जो जल्द ही दुश्मनी में बदल गई। 2012 में एक बार फिर गोलियां चलीं। गैंगस्टर अमनदीप सिंह उर्फ हैप्पी दियोड़ा की हत्या शेरा खुब्बण ने कर दी। हैप्पी अकाली नेता सुखदीप सेखों का करीबी था, जिसकी खुद एक साल बाद गोली मारकर हत्या कर दी गई। 2013 में, चमकौर सिंह ने गुरु गोबिंद सिंह मेडिकल कॉलेज के ऑर्थोपेडिक वार्ड में अपने दुश्मन रणजीत सिंह को गोली मार दी। इसके जवाब में रणजीत के गुर्गों ने चमकौर के भाई और भतीजे की हत्या कर दी। बदले की इस आग में झुलसते हुए चमकौर सिंह बाद में लॉरेंस बिश्नोई गैंग में शामिल हो गया। पुलिस हिरासत में हत्या… 2015 में एक और सनसनीखेज वारदात सामने आई। कुख्यात गैंगस्टर सुखा काहलवां की पुलिस हिरासत में गोली मारकर हत्या कर दी गई। इस हत्या की जिम्मेदारी लेते हुए विक्की गौंडर ने कहा, “यह मेरे दोस्त लवली बाबा की मौत का बदला था।” इस हत्या में इस्तेमाल की गई कार इंस्पेक्टर इंदरजीत के पास से बरामद हुई थी, जिसे बाद में खुद ड्रग्स केस में गिरफ्तार कर लिया गया।