अजीत झा.
चंडीगढ़। सेक्टर-27 स्थित करोड़ों की प्रॉपर्टी से जुड़े 50 करोड़ रुपये की कथित धोखाधड़ी मामले में चंडीगढ़ पुलिस की जांच एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। करीब तीन साल की जांच के बाद केस को “अनट्रेस” घोषित कर बंद करने की पुलिस की कोशिश पर जिला अदालत ने कड़ा रुख अपनाते हुए न सिर्फ रिपोर्ट स्वीकार करने से इनकार कर दिया, बल्कि दोबारा विस्तृत जांच कर फाइनल रिपोर्ट पेश करने के निर्देश भी जारी कर दिए।यह मामला 100 वर्षीय रिटायर्ड कर्नल प्यारा सिंह की संपत्ति से जुड़ा है, जिनका निधन हो चुका है। पुलिस ने वर्ष 2022 में कर्नल की सेक्टर-27 स्थित प्रॉपर्टी को लेकर फर्जी वसीयत तैयार कर संपत्ति हड़पने के आरोप में नौ लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की थी। आरोपितों में कर्नल की बेटी नीलम सारंग (यमुनानगर), दामाद विनोद कुमार, बहुएं और अन्य करीबी रिश्तेदार शामिल हैं।
तीन साल बाद “सिविल विवाद” बताकर केस बंद
लंबी जांच के बाद पुलिस ने मामले को आपराधिक न मानते हुए सिविल विवाद करार दिया और जिला अदालत में अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल कर दी। हालांकि अदालत ने इस रिपोर्ट को खारिज करते हुए फाइल जांच अधिकारी को वापस लौटा दी और साफ कहा कि अधूरी और अस्पष्ट जांच के आधार पर केस बंद नहीं किया जा सकता।
सीएफएसएल रिपोर्ट बनी पुलिस की दलील
पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 17 दिसंबर 2017 की विवादित वसीयत को लेकर सीएफएसएल की जांच से यह साफ नहीं हो सका कि दस्तावेज असली है या जाली। इसी आधार पर पुलिस किसी ठोस निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी और अनट्रेस रिपोर्ट दाखिल की।
हालांकि सीएफएसएल की पहली रिपोर्ट में वसीयत की टाइपिंग, लाइन स्पेसिंग और हस्ताक्षरों को लेकर गंभीर संदेह जताया गया था। दूसरी जांच रिपोर्ट में भले ही स्पष्ट छेड़छाड़ के संकेत नहीं मिले, लेकिन दस्तावेज को असली या जाली घोषित करने से परहेज किया गया, जिससे मामला और उलझ गया।
शिकायतकर्ता का आरोप
आरोपियों को बचाने की कोशिश
कर्नल प्यारा सिंह के पोते और शिकायतकर्ता विक्रम देव सारंग ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस ने पहले हाईकोर्ट में हलफनामा देकर वसीयत को फर्जी बताया था और चार्जशीट दाखिल करने की बात कही थी, लेकिन अब अचानक केस को अनट्रेस घोषित कर आरोपियों को बचाने की कोशिश की जा रही है।
जांच अधिकारी पर भी उठे सवाल
विक्रम देव सारंग ने जांच अधिकारी एएसआई जितेंद्र सिंह के खिलाफ पुलिस विभाग में शिकायत भी दी है। आरोप है कि केस से जुड़े अहम गवाहों के बयान जानबूझकर फाइल से हटाए गए और अदालत में उनकी प्रतियां पेश नहीं की गईं। इससे पूरी जांच प्रक्रिया पर संदेह खड़ा हो गया है।
अब फिर से खुलेगी फाइल
अदालत के आदेश के बाद यह साफ हो गया है कि करोड़ों की इस प्रॉपर्टी से जुड़ा मामला अभी खत्म नहीं हुआ है। अब पुलिस को नए सिरे से जांच कर तथ्यों के आधार पर फाइनल रिपोर्ट दाखिल करनी होगी। इस केस में आगे और खुलासे होने की संभावना से इनकार नहीं किया जा रहा है।