असम में बाढ़ का पानी उतरने के साथ जनजीवन धीरे-धीरे सामान्य होने लगा है, लेकिन प्रभावित परिवारों के सामने घरों से गाद निकालने, क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत और बर्बाद खेतों को दोबारा तैयार करने की बड़ी चुनौती है। राज्य में बाढ़ से अब तक 106 लोगों की मौत हुई है। शिवसागर, नगांव, गोलाघाट और जोरहाट के 90 गांवों में 16,922 लोग प्रभावित हैं और 3,057 हेक्टेयर कृषि भूमि जलमग्न रही।
गुवाहाटी (Naren Danu) : असम में बाढ़ का पानी तेजी से उतर रहा है, लेकिन पीछे छूटी तबाही ने प्रभावित परिवारों के सामने नई मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। घरों में जमा गाद और मिट्टी साफ करने से लेकर क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत और बर्बाद खेतों को दोबारा खेती योग्य बनाने तक लोगों को अब पुनर्वास की लंबी चुनौती से गुजरना पड़ रहा है।
असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के 19 अगस्त के आंकड़ों के अनुसार, राज्य की सभी नदियां खतरे के निशान से नीचे बह रही हैं और जलस्तर लगातार घट रहा है। हालांकि, बाढ़ का असर अभी भी शिवसागर, नगांव, गोलाघाट और जोरहाट जिलों में बना हुआ है।
इन चार जिलों के 13 राजस्व मंडलों के 90 गांव बाढ़ से प्रभावित हैं। करीब 16,922 लोग अब भी बाढ़ के प्रभाव में हैं, जबकि 3,057 हेक्टेयर कृषि भूमि पानी में डूबी हुई है। इस साल बाढ़ और उससे जुड़ी घटनाओं में अब तक 106 लोगों की जान जा चुकी है।
राहत शिविरों में घट रही संख्या
हालात सामान्य होने के साथ राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की संख्या भी कम हुई है। अब राज्य में सिर्फ सात सरकारी राहत शिविर संचालित हैं, जहां 262 लोग शरण लिए हुए हैं। वहीं बाढ़ से प्रभावित पशुओं की संख्या 14,645 तक पहुंच गई है।
राहत और बचाव अभियान में पुलिस तथा प्रशासन की टीमें लगातार जुटी हुई हैं। प्रभावित इलाकों में स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचाने के लिए राज्य सरकार ने मंगलवार को 17 मेडिकल टीमों को तैनात किया। टीमें प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की स्वास्थ्य जांच के साथ आवश्यक चिकित्सा सहायता उपलब्ध करा रही हैं।
सर्वे के बाद नुकसान की भरपाई का भरोसा
बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के लिए सरकारी स्तर पर सर्वेक्षण जारी है। इसमें मकानों, कृषि भूमि, फसलों और अन्य संपत्तियों को हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा ने भरोसा दिया है कि सर्वे पूरा होने के बाद बाढ़ से हुए विभिन्न प्रकार के नुकसान की भरपाई के लिए आवश्यक व्यवस्था की जाएगी। फिलहाल प्रभावित परिवारों के सामने अपने घरों और खेतों को फिर से खड़ा करने की चुनौती है।