चंडीगढ़ 12 Feb । कांग्रेस सांसद एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को संसद से अयोग्य ठहराने की दिशा में भाजपा ने पहला औपचारिक कदम उठा दिया है। भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने राहुल गांधी की सदस्यता रद्द कराने के लिए लोकसभा सचिवालय में प्रक्रिया शुरू करते हुए नोटिस दाखिल किया है। यह कदम राहुल गांधी और भाजपा सांसदों के बीच लगातार चल रहे तीखे टकराव के बीच उठाया गया है, जिसमें पूर्व सेना प्रमुख जनरल एम.एम. नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब के कथित सर्कुलेशन का मामला भी शामिल है।
निशिकांत दुबे ने आरोप लगाया कि राहुल गांधी विदेशी ताकतों से जुड़े नजर आते हैं और जानबूझकर संसद के मंच का इस्तेमाल देश की छवि खराब करने के लिए कर रहे हैं। दुबे ने कहा, “राहुल गांधी को कौन फंडिंग कर रहा है? उन्हें अनपब्लिश्ड किताब कैसे मिली? लोकसभा को उनकी सदस्यता पर गंभीरता से विचार करना चाहिए।”
नोटिस में कहा गया है कि राहुल गांधी लगातार रक्षा, वित्त, वाणिज्य और विदेश नीति जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बेबुनियाद आरोप लगाकर जनता को गुमराह करते हैं। साथ ही उन पर ‘सोरोस फाउंडेशन’ से जुड़े होने और देश को अंदर से अस्थिर करने की कोशिश करने जैसे आरोप भी लगाए गए हैं।
भाजपा का आरोप है कि 11 फरवरी 2026 को संसद में दिए भाषण के दौरान राहुल गांधी ने भारतीय कॉर्पोरेट घरानों पर गंभीर आरोप लगाकर बैंकिंग सिस्टम को बदनाम करने की कोशिश की।
यह पहली बार नहीं है जब राहुल गांधी की संसद सदस्यता पर सवाल उठे हों। मार्च 2023 में मानहानि मामले में सजा के बाद उन्हें लोकसभा से अयोग्य ठहराया गया था, हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट से राहत मिली थी।
इस पूरे मामले पर कांग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। कांग्रेस सांसद रेणुका चौधरी ने कहा कि निशिकांत दुबे मंत्री बनने की लालसा में इस तरह के बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा, “इन्हें प्रिविलेज मोशन का मतलब भी नहीं पता।”
कांग्रेस सांसद केसी वेणुगोपाल ने भाजपा पर दोहरा रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि राहुल गांधी की बातों को रिकॉर्ड से हटाया जाता है जबकि सरकार के मंत्रियों की समान टिप्पणियों को रहने दिया जाता है।
वहीं लोकसभा में भाजपा के मुख्य सचेतक संजय जायसवाल ने स्पीकर से राहुल गांधी के भाषण के कुछ हिस्सों को हटाने की मांग की है, यह कहते हुए कि उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी और केंद्र सरकार के खिलाफ निराधार आरोप लगाए हैं।
इधर दिल्ली पुलिस ने जनरल नरवणे की अनपब्लिश्ड किताब के कथित लीक मामले में जांच तेज कर दी है और क्रिमिनल कॉन्सपिरेसी की धाराएं जोड़ी हैं। स्पेशल सेल ने पेंगुइन इंडिया की टीम से पूछताछ कर 15 सवालों का नोटिस जारी किया है।
राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम को संसद के भीतर बढ़ते टकराव और आने वाले सियासी संघर्ष का संकेत माना जा रहा है।