पंजाब में सरकारी ट्रांसफर-पोस्टिंग को प्रभावित करने के कथित नेटवर्क की जांच में ED के 9 पन्नों के दस्तावेज में WhatsApp चैट्स, कॉल रिकॉर्ड और अन्य दस्तावेजों के आधार पर कई गंभीर दावे किए गए हैं। जांच का दायरा ट्रांसफर-पोस्टिंग से आगे बढ़कर टेंडर, सरकारी नीतियों, हथियार लाइसेंस, जमीन सौदों और मंजूरियों तक पहुंचने का दावा है। हालांकि दस्तावेज में दर्ज आरोप जांचाधीन हैं और दोष अदालत की प्रक्रिया से ही तय होगा।
चंडीगढ़ : पंजाब में सरकारी ट्रांसफर-पोस्टिंग को प्रभावित करने के कथित नेटवर्क की जांच अब कई विभागों और मामलों तक पहुंच गई है। प्रवर्तन निदेशालय (ED) के 9 पन्नों के दस्तावेज में WhatsApp चैट्स, कॉल रिकॉर्ड्स और अन्य दस्तावेजों के आधार पर ट्रांसफर-पोस्टिंग, सरकारी नीतियों, टेंडर, हथियार लाइसेंस, जमीन सौदों और सरकारी मंजूरियों में कथित दखल के दावे किए गए हैं।
ED के मुताबिक, 7 से 10 मई 2026 के बीच अजय सहगल और इंडियन कोऑपरेटिव हाउसिंग बिल्डिंग सोसायटी से जुड़े मामले की जांच के दौरान अजय सहगल, नितिन गोहल, सुरेश कुमार बजाज और अन्य लोगों के परिसरों पर तलाशी ली गई। इस दौरान कुछ आपत्तिजनक जानकारी और दस्तावेज बरामद होने का दावा किया गया।
नितिन गोहल को कथित नेटवर्क का मुख्य चेहरा बताया
ED के दस्तावेज में नितिन गोहल पर सबसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। एजेंसी का दावा है कि वह सरकारी अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग और मूवमेंट को प्रभावित करने, इच्छुक लोगों से पैसे जुटाने और दूसरे लोगों के साथ समन्वय करने में कथित तौर पर सक्रिय था।
दस्तावेज में नितिन गोहल के साथ बिर दविंदर सिंह, राजबीर घुम्मन और जितिन गोहल उर्फ राजा के कथित समन्वय का उल्लेख है। ED का दावा है कि इनके जरिए नकद, जमीन और अन्य लाभ के रूप में करोड़ों रुपये की कथित आपराधिक आय जुटाई गई।
तलाशी के दौरान नितिन गोहल के पास से 20.98 लाख रुपये नकद मिलने का दावा भी दस्तावेज में है।
मुख्यमंत्री कार्यालय से जुड़ी चैट का भी उल्लेख
ED ने 23 जनवरी 2026 की एक चैट का हवाला देते हुए दावा किया है कि जितिन गोहल उर्फ राजा को मुख्यमंत्री कार्यालय में जगह दिलाने के लिए डॉ. रोमी, राजा महाजन और राजबीर घुम्मन के जरिए प्रयास किए गए।
चैट में कुमार अमित से राजा गोहल के अस्थायी प्रवेश कार्ड में पदनाम बदलने को लेकर अनुरोध का जिक्र है।
2023 से 2026 तक ट्रांसफर-पोस्टिंग की 21 एंट्री
दस्तावेज में 20 सितंबर 2023 से 18 मार्च 2026 तक ट्रांसफर-पोस्टिंग से जुड़ी 21 एंट्रीज का उल्लेख है।
इनमें आर.एस. नागरा, मनिश पजनी, अमरजीत सिंह, डीएसपी परमिंदर राजन, मनजीत सिंह तिवाना और संगीता कुमार से जुड़े मामलों का जिक्र है।
इसके बाद परमनीत कौर, डीएसपी ओंकार सिंह, डीएसपी तेजबीर सिंह, डीएफओ गुरमनप्रीत सिंह, आईएएस डॉ. शेना अग्रवाल, आईएएस विम्मी भुल्लर, एसई हरकीरन सिंह, पीसीएस सचिन पाठक, पीसीएस रविंदर सिंह अरोड़ा, अमनदीप सिंह, पीपीएस जसपिंदर सिंह और अन्य अधिकारियों की पोस्टिंग से जुड़ी चर्चाओं का उल्लेख मिलता है।
ED के दस्तावेज में यह भी दावा है कि 2025-26 में IAS, IPS, DSP और PCS अधिकारियों की ड्राफ्ट ट्रांसफर सूचियां आधिकारिक रूप से जारी होने से पहले ही साझा की गईं।
29 जनवरी 2026 को DSP अधिकारियों की ड्राफ्ट सूची, 18 फरवरी को PCS अधिकारियों की सूची और 1 अप्रैल 2026 को DSP अधिकारियों की एक अन्य सूची साझा किए जाने का दावा किया गया है।
नीति और टेंडर में भी कथित दखल
ED के मुताबिक, कथित नेटवर्क का दायरा केवल ट्रांसफर-पोस्टिंग तक सीमित नहीं था।
FRK टेंडर, खाद्यान्न परिवहन नीति, पशुपालन विभाग में डिस्ट्रीब्यूटर बदलने, अस्पताल के लाइसेंस नवीनीकरण और वेरका से जुड़े मामलों में कथित प्रभाव की बात दस्तावेज में कही गई है।
21 जनवरी 2026 की एक चैट में मार्कफेड की टेंडर प्रक्रिया को कथित तौर पर प्रभावित करने की कोशिश का उल्लेख है, जिसमें IAS विकास प्रताप सिंह का नाम आता है।
24 जनवरी 2026 की चैट में सचिव पद के लिए नामों पर चर्चा का भी जिक्र है।
हथियार लाइसेंस के मामलों में भी कई नाम
ED के दस्तावेज में हथियार लाइसेंस से जुड़े मामलों में काकू अहलूवालिया, डॉ. रोमी, चुस्पिंदर चहल, सतविंदर सिंह कंबोज, तुषार गुप्ता, अमृतपाल ढीढसा, विक्की और कन्नू के नाम दर्ज हैं।
दस्तावेज के मुताबिक, कुछ मामलों में लाइसेंस दिलाने, नवीनीकरण कराने या प्रक्रिया तेज कराने को लेकर नितिन गोहल से कथित संपर्क और मदद की बातचीत हुई।
जमीन और सरकारी मंजूरियों का कनेक्शन
जमीन और रियल एस्टेट से जुड़े मामलों में आर.एस. नागरा, बिर दविंदर सिंह, अंकुश कालरा, जसनीत सिंह, धालीवाल, तरुण और नवराज पीसीएस के नाम सामने आते हैं।
ED के अनुसार, पंजाब में जमीन खरीद, जालंधर के डेवलपर्स, RKM हाउसिंग, GMADA मंजूरियों, बिजली कनेक्शन, CLU और अन्य सरकारी प्रक्रियाओं को लेकर कथित हस्तक्षेप की बातचीत सामने आई।
वेस्टर्न टावर्स, मोहाली से जुड़े मामले में तरुण और नवराज PCS का भी उल्लेख है।
मोहाली की D-156 संपत्ति पर भी सवाल
ED के दस्तावेज में मोहाली के फेज-7, फोकल प्वाइंट की D-156 संपत्ति का जिक्र है।
दस्तावेज के मुताबिक, प्रीतपाल ढींडसा ने 2022 में यह संपत्ति नितिन गोहल और बिर दविंदर सिंह को 1.22 करोड़ रुपये की घोषित कीमत पर बेची। ED का दावा है कि संपत्ति की वास्तविक कीमत करीब 5 करोड़ रुपये थी और घोषित रकम से अधिक राशि नकद में दिए जाने की संभावना की जांच की जा रही है।
ED ने इस सौदे को कथित ट्रांसफर-पोस्टिंग भ्रष्टाचार से संभावित ‘क्विड प्रो क्वो’ के एंगल से जांचने की बात कही है।
भुगतान और वित्तीय लेन-देन के भी दावे
ED के दस्तावेज में कमल पंक की ओर से 10 लाख रुपये देने की कथित बातचीत का उल्लेख है।
इसके अलावा नितिन गोहल की इस्तेमाल की जा रही मर्सिडीज की मेंटेनेंस के लिए 1 लाख रुपये नकद भुगतान, फोर्टेक वेब सॉल्यूशन से जुड़े 30 लाख रुपये के लेन-देन, करन भूषण से जुड़े कथित हवाला टोकन और जसनीत सिंह से जुड़ी 2 लाख रुपये की ट्रांसफर एंट्री का भी जिक्र है।
दस्तावेज के मुताबिक, नितिन गोहल ने बिर दविंदर सिंह और राजबीर घुम्मन के हवाई टिकट और होटल ठहरने का खर्च भी कथित तौर पर नकद में किया।
सरकारी गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचने का दावा
ED ने दावा किया है कि ट्रांसफर प्रस्ताव, पोस्टिंग आदेश, नीति दस्तावेज और प्रशासनिक मंजूरियों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक होने से पहले कुछ लोगों तक पहुंच रही थी।
दस्तावेज में आर.एस. नागरा से जुड़े खनन और परिवहन टेंडर, कमल पंक से जुड़े दस्तावेज, नायब तहसीलदार के ड्राफ्ट आदेश और हाउसिंग प्रोजेक्ट की नोटशीट जैसी जानकारी का उल्लेख किया गया है।
अब जांच के घेरे में कौन-कौन से एंगल?
ED के दस्तावेज में ट्रांसफर-पोस्टिंग के अलावा कथित अवैध भुगतान, जमीन सौदे, टेंडर प्रक्रिया, सरकारी नीतियों में हस्तक्षेप, हथियार लाइसेंस और गोपनीय सरकारी दस्तावेजों तक कथित अनधिकृत पहुंच जैसे कई एंगल सामने रखे गए हैं।
एजेंसी ने आधिकारिक गोपनीयता कानून और भ्रष्टाचार निवारण कानून के तहत आगे जांच की जरूरत बताई है। साथ ही भारतीय दंड संहिता की धारा 120बी, 420, 467 और 471 के तहत संज्ञेय अपराध होने की संभावना का उल्लेख किया है।
अब बड़ा सवाल यही है कि ED के इन निष्कर्षों के आधार पर आगे क्या कानूनी कार्रवाई होती है और क्या जांच का दायरा इन कथित नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों तक भी पहुंचता है।
फिलहाल दस्तावेज में दर्ज सभी बातें ED की जांच में सामने आए आरोप, चैट्स और जांची जा रही संभावनाएं हैं। किसी भी व्यक्ति को केवल नाम सामने आने या किसी चैट में उल्लेख होने के आधार पर दोषी नहीं माना जा सकता। अंतिम आपराधिक जिम्मेदारी जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही तय होगी।