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मुंबई , 23 फरवरी । प्राइवेट क्षेत्र के बैंक IDFC First Bank ने अपनी चंडीगढ़ शाखा में लगभग ₹590 करोड़ के कथित धोखाधड़ी (फ्रॉड) का खुलासा किया है, जो हरियाणा सरकार से जुड़े खातों से जुड़ा है। बैंक ने यह जानकारी अपनी SEBI फाइलिंग में दी और मामले की सूचना भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) समेत संबंधित एजेंसियों को दी है। इस मामले में बैंक ने चार कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है और एक फॉरेंसिक ऑडिट के लिए KPMG को नियुक्त किया है। कैसे सामने आया मामला? समस्या तब उजागर हुई जब हरियाणा सरकार के एक विभाग ने अपना खाता बंद कर अन्य बैंक में स्थानांतरण का अनुरोध किया। इस दौरान बैंक बही और विभाग के रिकॉर्ड में भारी मतभेद पाया गया, जिसका मिलान करने पर 590 करोड़ रुपये के गड़बड़ी का पता चला। शेयर बाजार में तूफ़ान घोटाले के खुलासे के बाद बैंक के शेयर बाजार में लगभग 20% गिरावट के साथ लोअर सर्किट तक पहुँच गए, जिससे निवेशकों को भारी नुकसान हुआ और लगभग ₹14,000 करोड़ का मार्केट वैल्यू घट गया। सरकार और जांच एजेंसियाँ सक्रिय हरियाणा सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बैंक को सरकारी लेन-देन के लिए डि-एम्पैनल कर दिया है और एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) तथा विजिलेंस को जांच सौंप दी है। राज्य के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि एक-एक पैसा वसूल किया जाएगा और दोषियों को बख़्शा नहीं जाएगा। RBI ने दी स्पष्टता भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) ने कहा है कि यह मामला सिस्टमेटिक बैंकिंग रिस्क नहीं है और बैंकिंग प्रणाली पर इसका व्यापक प्रभाव नहीं है, लेकिन निगरानी कड़ी की जाएगी।