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चंडीगढ़/यूटर्न/17 मार्च। पंजाब में अवैध कॉलोनियों पर सख्ती के दावे करने वाली सरकार के बीच जमीनी हकीकत कुछ और ही नजर आ रही है। कारोबारी शहर लुधियाना के बाहरी इलाकों में इन दिनों बड़े पैमाने पर अवैध इंडस्ट्रियल कॉलोनियां काटे जाने की चर्चा जोरों पर है। बताया जा रहा है कि जीटी रोड हाईवे पर दोराहा–साहनेवाल के पास रेड मैंगो के नजदीक गांव बिलगा और नजारा क्षेत्र में खुलेआम औद्योगिक कॉलोनियां विकसित की जा रही हैं। सूत्रों के अनुसार इन कॉलोनियों में एक से दो एकड़ तक के प्लॉट सीधे फैक्टरी मालिकों के नाम रजिस्ट्री कराए जा रहे हैं। इस प्रक्रिया के जरिए कॉलोनाइजर कथित तौर पर सरकारी नियमों को दरकिनार कर अधिकारियों की आंखों में धूल झोंक रहे हैं। चर्चाओं के मुताबिक इन इलाकों में करीब 100–100 एकड़ की दो से तीन बड़ी कॉलोनियां काटी जा चुकी हैं, जिससे सरकार को करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है। नियमों के मुताबिक किसी भी कॉलोनी को विकसित करने के लिए कॉलोनाइजर के पास जमीन की 100 प्रतिशत रजिस्ट्री होना और एडवांस ईडीसी (External Development Charges) जमा कराना अनिवार्य होता है। इसके बावजूद किसानों से सीधे फैक्टरी मालिकों के नाम रजिस्ट्री करवाकर कथित तौर पर पूरा खेल चलाया जा रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लोकल बॉडी मंत्री संजिव अरोड़ा के शहर में ही इस तरह की गतिविधियां प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े कर रही हैं। आरोप यह भी हैं कि कॉलोनाइजर कॉलोनी के अंदर बनने वाली सड़कों की रजिस्ट्री सरकार के नाम करवाकर रिकॉर्ड को वैध दिखाने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें राजस्व विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत की भी चर्चाएं हैं। इधर नियमों के तहत काम करने वाले डेवलपर्स और कारोबारियों में भी असंतोष देखने को मिल रहा है। उनका कहना है कि जब अवैध कॉलोनियां बिना कार्रवाई के फल-फूल रही हैं तो नियमों का पालन करने वालों को आर्थिक नुकसान और प्रतिस्पर्धा में पिछड़ने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इन अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो आने वाले समय में यह क्षेत्र अनियोजित औद्योगिक विस्तार और बुनियादी सुविधाओं के संकट का केंद्र बन सकता है।