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चंडीगढ़/ यूटर्न/ 18 मार्च।नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की ताजा रिपोर्ट ने पंजाब की जेल व्यवस्था की गंभीर खामियों को उजागर किया है। रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र द्वारा जारी मॉडल जेल मैनुअल 2016 को लागू करने में राज्य सरकार ने करीब छह साल की देरी की, जिससे जेलों की स्थिति लगातार बिगड़ती गई। रिपोर्ट में बताया गया है कि जहां ये दिशा-निर्देश 2016 में जारी हुए थे, वहीं पंजाब में इन्हें 2022 में लागू किया गया। इस देरी का सीधा असर कैदियों को मिलने वाली बुनियादी सुविधाओं—जैसे स्वच्छता, स्वास्थ्य सेवाएं और सम्मानजनक जीवन—पर पड़ा। स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति बेहद चिंताजनक पाई गई। जेल अस्पतालों में 72% बेड और 60% मेडिकल स्टाफ की कमी है। इसी कारण 45,497 कैदियों को इलाज के लिए बाहरी अस्पतालों में भेजना पड़ा, जिनमें से 22 कैदी फरार भी हो गए, जिससे सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठे हैं। सफाई व्यवस्था भी बदहाल है। 74% पुरुष और 63% महिला बैरकों में पर्याप्त शौचालय नहीं हैं। कई जेलों में कपड़े धोने की मशीनें और बायलर जैसी बुनियादी सुविधाएं भी नहीं हैं। वहीं, 39% जेलों में पीने के पानी की गुणवत्ता की जांच तक नहीं कराई गई। महिला कैदियों की स्थिति और भी चिंताजनक है, जहां कई जगहों पर सैनिटरी पैड जैसी आवश्यक सुविधाएं नियमित रूप से उपलब्ध नहीं हैं। इसके अलावा, जेलों के निर्माण और अपग्रेडेशन में देरी, जैसे नाभा जेल का मामला, प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है। यह रिपोर्ट स्पष्ट करती है कि जेल सुधारों को लेकर तत्काल और ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि कैदियों के अधिकारों और सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके।