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अशोक सहगल लुधियाना, 28 मार्च : दयानंद मेडिकल कॉलेज एव अस्पताल की मैनेजिंग कमेटी मैं बिल न अदा होने के बदले में मृतक मरीज की डेड बॉडी को रोके रखने का एक और मामला सामने आया है प्राप्त विवरण के अनुसार अंबदेकर कालोनी निवासी गगनदीप (31) का डीएमसी अस्पताल में किडनी की बीमारी का इलाज चल रहा था। शुक्रवार सुबह उसकी मौत हो गई। बकाया 1.16 लाख भुगतान न होने की वजह से परिवार को शव नहीं दिया जा रहा था रह था। मृतक के परिजनों ने किस सामाजिक संगठनों का कार्य कर्ताओं का द्वारा खटखटाया जैसे ही यह मामला मानवाधिकार आयोग के संज्ञान में आया उन्होंने पौराणिक टीम दयानंद अस्पताल भेज दी गौर तलब है कि एक और मृतक का शव परिवार को दिलवाने के लिए मानवाधिकार आयोग को हस्तक्षेप करना पड़ा। मृतक युवक की शुक्रवार सुबह मौत हो गई थी। उसके इलाज का एक लाख 16 हजार रुपए का बिल बकाया था। अस्पताल परिवार से बकाया बिल मांग रहा था जबकि परिवार के पास भुगतान के लिए पैसे नहीं थे। आखिरकार यह मामला मानवाधिकार आयोग पंजाब के पास पहुंचा, जिस पर आयोग ने अस्पताल में टीम भेजकर बॉडी रिलीज करवाई मानवाधिकार आयोग को कई बार शव रिलीज करवाने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ा। मृतक परिवार का इकलौता बेटा था। उसकी छह महीने की बेटी व चार साल का बेटा है। वह पेंटर के तौर पर दिहाड़ी करके परिवार का पेट पालता था। परिवार ने जैसे तैसे करके उसके इलाज पर खर्च किया लेकिन अब उनके पास बकाया देने के लिए पैसे नहीं था। उल्लेखनीय की पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग पहले ही कह चुका है कि अस्पतालों द्वारा बिल की अदायगी ना होने पर भी मृतक मरीज के शव को रोके नही जा सकता ऐसा करना कानून का उल्लंघन है