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चंडीगढ़/यूटर्न/1 अप्रैल।नगर निगम में चीफ इंजीनियर के पद पर संजय अरोड़ा की दोबारा नियुक्ति को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। बिना आवेदन, बिना इंटरव्यू और पुराने आरोपों की जांच किए बिना हुई इस नियुक्ति ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में इसे लेकर तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। जानकारी के मुताबिक, जिन आरोपों के चलते पहले संजय अरोड़ा को पद से हटाया गया था, उन मामलों की जांच अब तक पूरी नहीं हुई है। इसके बावजूद उन्हें फिर से उसी पद पर बैठा दिया गया, जिससे पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। पूर्व मेयर एवं पार्षद अनूप गुप्ता ने इस फैसले की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि प्रशासन को पहले आरोपों की निष्पक्ष जांच करनी चाहिए थी। वहीं, पूर्व डिप्टी मेयर सतीश केंथ ने भी नियुक्ति प्रक्रिया पर हैरानी जताई है। उनका कहना है कि बिना जांच और चयन प्रक्रिया के किसी अधिकारी को इतनी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी देना गलत संदेश देता है। बताया जा रहा है कि इस मामले को लेकर कुछ पार्षद जल्द ही प्रशासक गुलाब चंद कटारिया से औपचारिक शिकायत करने की तैयारी में हैं। प्रक्रिया पर उठे सवाल सूत्रों के अनुसार, चीफ इंजीनियर पद के लिए विभिन्न राज्यों से करीब 12 अधिकारियों ने आवेदन किया था। इनमें कई उम्मीदवार योग्यता और अनुभव के मामले में मजबूत माने जा रहे थे, लेकिन किसी का इंटरव्यू तक नहीं लिया गया। ऐसे में चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। प्रशासन की भूमिका पर भी निशाना इस नियुक्ति को लेकर यह भी चर्चा है कि प्रशासन ने पूरी प्रक्रिया को औपचारिकता तक सीमित रखा। खास बात यह है कि पहले इसी पद पर एक्सटेंशन देने से इनकार किया गया था, लेकिन अब उसी अधिकारी की पुनर्नियुक्ति ने फैसलों की विश्वसनीयता पर भी प्रश्नचिह्न लगा दिया है। कुल मिलाकर, यह मामला अब केवल एक नियुक्ति तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि प्रशासनिक पारदर्शिता, जवाबदेही और चयन प्रक्रिया की निष्पक्षता पर बड़ा सवाल बनता जा रहा है।