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जगरांव/यूटर्न/6अप्रैल। इलाके के गांव मधेपुर और सतलुज दरिया के भीतर चल रहे कथित अवैध खनन का मामला अब गरमाता जा रहा है। एक स्थानीय शिकायतकर्ता ने प्रेस नोट जारी कर न केवल माइनिंग माफिया पर प्रहार किया है, बल्कि जिला प्रशासन और खनन विभाग की कार्यप्रणाली को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है। शिकायतकर्ता का आरोप है कि रसूखदारों के संरक्षण में यह खेल लंबे समय से जारी है। ​प्रमुख बिंदु: शिकायतों के बाद भी नहीं रुकी मशीनें ​रात का खेल: शिकायतकर्ता के अनुसार, पिछले एक महीने से मधेपुर में रात के समय अवैध माइनिंग की जा रही है। भारी मशीनों के जरिए दरिया का सीना चीरा जा रहा है और ट्रॉलियों की लंबी कतारें रेत ढो रही हैं। ​प्रशासनिक सुस्ती: दावा किया गया है कि 23 मार्च को ही उच्च अधिकारियों को सबूतों के साथ पत्र भेजा गया था, लेकिन जमीनी स्तर पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। ​वीडियो सबूत: अवैध माइनिंग और रेत ढोती ट्रॉलियों के वीडियो भी संबंधित अधिकारियों और पुलिस कंट्रोल रूम को भेजे गए हैं, इसके बावजूद विभाग मौन साधे हुए है। ​चंडीगढ़ से निष्पक्ष जांच टीम भेजने की मांग ​शिकायतकर्ता ने स्थानीय तंत्र पर मिलीभगत का अंदेशा जताते हुए मांग की है कि: ​"स्थानीय अधिकारी कार्रवाई करने में विफल रहे हैं, इसलिए चंडीगढ़ मुख्यालय से एक ईमानदार और निष्पक्ष जांच टीम भेजी जाए। मौके पर भारी मशीनरी का इस्तेमाल नियमों और पर्यावरण, दोनों के लिए खतरा है।" ​फिलहाल विभाग की चुप्पी बरकरार ​इस गंभीर मामले और प्रशासन पर लगे आरोपों को लेकर अभी तक माइनिंग विभाग या स्थानीय पुलिस की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर जल्द ही सख्त एक्शन नहीं लिया गया, तो वे बड़े स्तर पर विरोध प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे।