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पंजाब राज्य अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन सरदार जसवीर सिंह गढ़ी ने स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर (मेल) कैडर की शिकायत पर सख्त कार्रवाई करते हुए 29 अप्रैल को सामाजिक न्याय, अधिकारिता एवं अल्पसंख्यक विभाग की रोस्टर चेकिंग टीम नंबर-22 को एस.सी. आयोग कार्यालय में पेश होने के आदेश जारी किए हैं। शिकायत पर कार्रवाई करते हुए आयोग के चेयरमैन ने पहले संबंधित विभाग से पिछले 15 वर्षों के दौरान मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर (मेल) से मल्टीपरपज हेल्थ वर्कर सुपरवाइजर (मेल) के रूप में हुई पदोन्नतियों के रिकॉर्ड की जांच के लिए रोस्टर चेकिंग टीम द्वारा सत्यापित रोस्टर रजिस्टर मांगा था। संबंधित विभाग के दफ्तर के कर्मचारियों ने 21 नवंबर 2025 को भलाई विभाग की रोस्टर चेकिंग टीम नंबर-22 से पिछले 12 वर्षों का जांचा हुआ रिकॉर्ड 27 नवंबर को एस.सी. आयोग के कार्यालय में प्रस्तुत किया था। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि प्रस्तुत रिकॉर्ड में आरक्षण नीति को बिल्कुल लागू नहीं किया गया था। चेयरमैन गढ़ी द्वारा इस रिकॉर्ड को रोस्टर विशेषज्ञों से जांच करवाने के बाद पाया गया कि रिकॉर्ड में 1 दिव्यांग और 8 सामान्य वर्ग के कर्मचारियों को अनुसूचित जाति कर्मचारियों के रूप में दर्शाया गया है। इसके अलावा, इस अवधि के दौरान पदोन्नति पाने वाले 19 सामान्य वर्ग के कर्मचारियों से संबंधित विवरण भी रिकॉर्ड में मौजूद नहीं हैं। उन्होंने बताया कि जांच के दौरान पता चला कि प्रस्तुत रिकॉर्ड में कुल 374 कर्मचारियों की पदोन्नतियों में एस.सी. कर्मचारियों के लिए 20 प्रतिशत आरक्षण के तहत 75 पद दर्शाए गए हैं। लेकिन इनमें से 69 आरक्षित पदों पर सामान्य वर्ग के कर्मचारी पाए गए, जो नियमों की खुली अवहेलना का प्रमाण है। चेयरमैन गढ़ी ने संबंधित विभाग के रिकॉर्ड की जांच में पाया कि एस.सी. वर्ग के कर्मचारियों के लिए पदोन्नतियों में 20 प्रतिशत आरक्षण नीति के साथ-साथ वरिष्ठता-कम-योग्यता (सीनियरिटी-कम-मेरिट) के सिद्धांत का भी गंभीर उल्लंघन किया गया है। उन्होंने कहा कि समय-समय पर माननीय अदालतों द्वारा दिए गए फैसलों, भलाई विभाग के जारी पत्रों तथा आरक्षण अधिनियम 2006 और 2018 को भी नजरअंदाज किया गया। इन अनियमितताओं का संज्ञान लेते हुए आयोग के चेयरमैन जसवीर सिंह गढ़ी ने 29 अप्रैल को रोस्टर चेकिंग टीम नंबर-22 के विश्वनाथ (सुपरिटेंडेंट), रेशम सिंह (सुपरिटेंडेंट), गगनदीप कौर संधू (सीनियर सहायक) और स्वास्थ्य विभाग के तोशपिंदर सिंह (सुपरिटेंडेंट) को व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष पेश होने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग के डायरेक्टर को भी उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं। एस.सी. आयोग, पंजाब के चेयरमैन गढ़ी ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा, “पंजाब के विभागों में संवैधानिक अधिकारों के साथ किसी भी प्रकार की अनियमितता या अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एस.सी. वर्ग के कर्मचारियों के अधिकारों का हनन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। इस प्रकार की लापरवाही करने वाले अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ एस.सी./एस.टी. अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 और प्रमुख सचिव, पंजाब के 9 जुलाई 2009 के पत्र के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।” उन्होंने आगे बताया कि भलाई विभाग की डायरेक्टर को पिछली फुल्ल आयोग बैठक के दौरान रोस्टर रजिस्टर समितियों को कानूनी पहलुओं के संबंध में अद्यतन कार्यशालाएं आयोजित करने के निर्देश दिए गए थे, जिनकी अनुपालना की समीक्षा भी की जाएगी।