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शाहपुर कॉलोनी के पुनर्वास को लेकर मंगलवार को कॉलोनी निवासियों का एक प्रतिनिधिमंडल पंजाब के गवर्नर गुलाबचंद कटारिया से मिला। यह मुलाकात सांसद मनीष तिवारी के दिशा-निर्देश पर महिला कांग्रेस प्रदेश सचिव ममता डोगरा के नेतृत्व में हुई। ममता डोगरा ने गवर्नर को बताया कि शाहपुर कॉलोनी चंडीगढ़ की आखिरी बची हुई ऐसी बस्ती है, जो कृषि भूमि पर बसी हुई है। उन्होंने कहा कि पहले चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड द्वारा निवासियों को एक्सेप्टेंस लेटर जारी किए गए थे, लेकिन बाद में प्रशासन ने पेराफेरी एक्ट लगाकर उन्हें मकान के लिए अयोग्य घोषित कर दिया। उन्होंने यह भी बताया कि इस मामले को लेकर निवासी हाई कोर्ट और साउथ एसडीएम के पास भी जा चुके हैं। इसके बाद जिला प्रशासन की ओर से 25 साल पुराने वोट संबंधी दस्तावेज जमा करने को कहा गया, जिसे निवासियों ने पूरा भी किया, लेकिन इसके बावजूद उन्हें अयोग्य ठहराना गलत है। ममता डोगरा ने संविधान के अनुच्छेद 21 का हवाला देते हुए कहा कि लोगों को आवास का अधिकार प्राप्त है। उन्होंने बताया कि कॉलोनी में रहने वाले लोग पिछले करीब 35 वर्षों से यहां रह रहे हैं और सभी जरूरी दस्तावेज जमा करने के बावजूद उन्हें अवैध बताना न्यायसंगत नहीं है। मामले की गंभीरता को देखते हुए गवर्नर गुलाबचंद कटारिया ने मौके पर ही डीसी से बातचीत की और आश्वासन दिया कि कॉलोनी निवासियों को नई योजना के तहत शामिल किया जाएगा। साथ ही यह भी कहा कि तब तक किसी भी निवासी को बेघर नहीं किया जाएगा। इस दौरान वेलफेयर कमेटी के प्रधान राजेश गिरी ने सांसद मनीष तिवारी और पूर्व सांसद सत्यपाल जैन का आभार जताते हुए कहा कि इस मुद्दे को लेकर वे पहले भी कई बार प्रशासन को पत्र लिख चुके हैं।