Uturn Time
Breaking
Mohali: Sohana में 18 दिन का गुरमत-गतका कैंप, सिख विरासत से जुड़ रहे युवा Gurugram: अवैध लिंग जांच पर सख्ती, गुरुग्राम स्वास्थ्य विभाग ने यूपी में गिरोह दबोचा Kaithal: ‘प्यारी बेटी’ मुहिम से बेटियों को मिलेगी नई पहचान और प्रेरणा: सीईओ सुरेश राविश New Delhi: जीडीपी आंकड़ों में सुधार, भारत की अर्थव्यवस्था 7.7% की दर से बढ़ने की उम्मीद Hushiarpur: होशियारपुर फोटोग्राफर एसोसिएशन की अहम बैठक हुई Mumbai: शेख फाउंडेशन की ओर से ईद-उल-अजहा डिनर दावत का भव्य आयोजन, मुंबई की नामचीन हस्तियों ने की शिरकत Hushiarpur: देश में ED और CBI जैसी एजेंसियों का राजनीतिकरण किया जा रहा है: प्रणव कृपाल Hushiarpur: ज़िला नशा मुक्ति पुनर्वास केंद्र हुशियारपुर में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Hoshiarpur: बीबीएमबी तलवाड़ा में विश्व पर्यावरण दिवस मनाया गया Kalayat: कलायत के मनखुश ने JEE Advanced में गाड़े सफलता के झंडे, हासिल किया ऑल इंडिया 1000वां रैंक नौकरी के लिए धरना दे रहे लोगों पर लाठीचार्ज, 10 हिरासत में लिए Kurukshetra: भारत की सांस्कृतिक शक्ति का प्रमाण व सनातन संस्कृति का वह अनमोल उपहार है योग: नायब सिंह सैनी
Logo
Uturn Time
धामी ने पंथक सम्मेलन में प्रस्तावों पर असहमति जताई
अमृतसर: पंजाब सरकार के नए बेअदबी कानून के खिलाफ अब शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (एसजीपीसी) ने मोर्चा खोल दिया है। प्रधान हरजिंदर सिंह धामी ने आज अमृतसर में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान पंजाब सरकार द्वारा बनाए गए कानून पर तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि सरकार ने यह संशोधन श्री आनंदपुर साहिब में विधानसभा सत्र के दौरान पारित किए लेकिन इस पूरी प्रक्रिया में एसजीपीसी और श्री अकाल तख्त साहिब से कोई सलाह-मशविरा नहीं किया गया जोकि बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। एसजीपीसी ने अब 31 मई को गुरुद्वारा श्री बाबा बकाला साहिब में एक बड़ा पंथक सम्मेलन बुलाया गया है, जिसमें निहंग सिंह जत्थे, दमदमी टकसाल, विभिन्न सिंह सभाएं और अन्य धार्मिक संगठन शामिल होंगे। यह सम्मेलन किसी टकराव के लिए नहीं बल्कि सिख संस्थाओं की स्वायत्तता और धार्मिक अधिकारों की रक्षा के लिए आयोजित किया जा रहा है। धामी ने पंजाब सरकार से अपील की कि विवादित प्रावधानों को वापस लिया जाए और धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप से बचा जाए। कई प्रावधानों को लेकर एसजीपीसी की आपत्ति धामी ने कहा कि पहला प्रस्ताव यह है कि पावन स्वरूपों की देखरेख करने वाले व्यक्ति पर कार्रवाई की बात कही गई है, जबकि दूसरा प्रस्ताव एसजीपीसी को एक महीने के भीतर सभी पावन स्वरूपों का पूरा रिकॉर्ड वेबसाइट पर डालने के निर्देश देता है। उन्होंने कहा कि इन दोनों बिंदुओं को लेकर सिख संस्थाओं में चिंता है। हर जानकारी को सार्वजनिक करना ठीक नहीं एसजीपीसी अध्यक्ष ने कहा कि संस्था के पास पहले से ही स्वरूपों की सुरक्षा और रिकॉर्ड के लिए आधुनिक और मजबूत प्रणाली मौजूद है। हर स्वरूप को देने से पहले गुरुद्वारा की जांच, सीसीटीवी व्यवस्था, अग्नि सुरक्षा और ग्रंथी सिंहों की पुष्टि जैसे सभी मानकों का पालन किया जाता है। ऐसे में इन जानकारियों को सार्वजनिक करना सुरक्षा की दृष्टि से उचित नहीं है और इससे धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंच सकती है।