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इंस्पेक्टर अमरेन्द्र बहादुर के अभियान में आरोपी चांद गिरफ्तार
कानपुर (सुनील बाजपेई) : यहां शिवली थाना क्षेत्र में जन शिकायतों के निस्तारण के साथ ही हर तरह के अपराधियों के खिलाफ जारी प्रभावी कार्यवाही के क्रम में एक नाबालिक लड़की का अपहरण करने के बाद उसके साथ बलात्कार करने और फिर उस पर धर्म परिवर्तन के लिए दबाव डालने वाले आरोपी को गिरफ्तार करने में सफलता प्राप्त कर ली गई।  देहात में महिला सम्बन्धी अपराधों की रोकथाम हेतु चलाये जा रहे विशेष अभियान के क्रम में वादी की नाबालिग भांजी को बहला-फुसलाकर ले जाने के सम्बन्ध में दिये गये दिये गये प्रार्थना पत्र के आधार पर थाना स्थानीय पर चन्दू मंसूरी उर्फ चांद पुत्र हामिद मंसूरी उम्र करीब 20 वर्ष निवासी ग्राम शंकर नगर के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने के बाद कानून और शांति व्यवस्था की पक्ष में अपराधियों के खिलाफ और पीड़ितों के हित में प्रभावी कार्यवाही में अपनी चुनौती पूर्ण नौकरी की शुरुआत से ही अग्रणी इंस्पेक्टर अमरेंद्र बहादुर सिंह सिंह ने अपहरण की गई नाबालिक को सकुशल बरामद भी कर लिया। शिवत्व यानी भगवान शंकर स्वभाव वाले इंस्पेक्टर अमरेंद्र बहादुर सिंह के कुशल नेतृत्व में आरोपी को पांडव नदी पुल के पास से गिरफ्तार करने वाली उनकी टीम में सब इंस्पेक्टर आनंद कुमार पांडे और कांस्टेबल रवि कुमार भी शामिल रहे।  स्थानीय सूत्रों का दावा है कि जब से व्यवहार कुशलता में अग्रणी निष्पक्ष और पारदर्शी कार्यशैली को महत्व देने वाले इंस्पेक्टर अमरेंद्र बहादुर सिंह ने शिवली की कमान संभाली है तब से पीड़ितों की सहायता के साथ ही अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कार्यवाही में इज़ाफा होने से क्षेत्र की जनता भी संतुष्टि के दायरे में है। जहां तक किसी की भी किसी भी पद या स्थान पर नियुक्ति का सवाल है। इसके आध्यात्मिक पक्ष के मुताबिक स्थानांतरण या किसी भी पद पर नियुक्ति के रूप में आपके कदम धरती के उस स्थान पर भी पड़ते हैं ,जहां जन्म के बाद पहले कभी नहीं पड़े होते और उन लोगों से भी मुलाकात होती है ,जिनसे पहले कभी नहीं मिले होते।  खास बात यह भी कि किसी भी पीड़ित की परेशानी का निस्तारण संबंधित के प्रति दुआओं का भी सृजक होता है जो कि उसके जीवन में फलित भी अवश्य ही होती हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि किसी के प्रति भी दुआओं और बद्दुआओं के रूप में बोले गए शब्द कभी नष्ट नहीं होते। ....और अगर होते तो हमारी या किसी की भी मोबाइल से बात नहीं होती ,क्योंकि अजर, अमर, अविनाशी अक्षर से शब्द और शब्द से बने वाक्य ही लिखने, पढ़ने और बोलने के रुप में ही इस संसार का संचालन करते हैं। मतलब अगर कुछ लिखा न जाए , पढ़ा ना जाए या कुछ कहा और बोला ना जाए तो इस संसार का संचालन हो ही नहीं सकता।  इसी के साथ साधारण या फिर किसी सक्षम पद के रूप में पुलिस विभाग में सेवारत होना भी संसार के अन्य सभी पदों और विभागों की अपेक्षा सर्वाधिक महत्वपूर्ण इसलिए है, क्योंकि संसार के संचालन की ईश्वरीय व्यवस्था में जितनी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका पुलिस विभाग की है, उतनी बड़ी महत्वपूर्ण भूमिका संसार के किसी अन्य विभाग अथवा किसी अन्य सर्वोच्च पद धारक की भी कदापि नहीं , पुलिस विभाग में किसी भी पदधारक के रूप में यह महत्वपूर्ण भूमिका संसार में इंसान के जन्म के पहले शुरू होती है और मरने के बाद भी जारी रहती है l यहां जन्म से पहले मतलब शिकायत पर इस आशय की जांच और विवेचना के रुप में कि पेट में बच्चा किसका है और मृत्यु के बाद भी इस आशय से कि हत्या किसने की है? मतलब जन्म के पहले से लेकर मृत्यु के बाद तक जैसी इतनी बड़ी भूमिका पुलिस के अलावा संसार के किसी भी विभाग या उसके सर्वोच्च पद धारक की भी कदापि नहीं है। यही नहीं जन्म से लेकर मृत्यु तक के बीच के समय यानी जीवन को व्यक्ति के कर्मों के अनुरूप सुख या दुख में बदलने के साथ ही उचित पात्र लोगों के जीवन को बचाने और अपराध के रूप में जनहित के विपरीत आचरण करने वाले के जीवन को मृत्यु (मुठभेड़) के रूप में समाप्त करने की भी क्षमता , सक्षमता और समर्थता शरीर धारी के रूप में वह रखता है ,जिसे पुलिस कहते हैं।