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मुख्य सचिव और हाउसिंग सचिव के परिजनों की ‘कवर्ड एरिया’ में जमीन, हितों के टकराव के आरोप
चंडीगढ़, 27 मई। पंजाब सरकार की विवादित लो इम्पैक्ट ग्रीन हैबिटेट्स (LIGH) नीति-2025 अब नए विवादों में घिर गई है। राज्य के मुख्य सचिव केएपी सिन्हा और हाउसिंग एवं शहरी विकास विभाग के सचिव विकास गर्ग के परिजनों के पास उन इलाकों में जमीन होने का मामला सामने आया है, जो इस नीति के दायरे में आते हैं। मामले को लेकर हितों के टकराव (Conflict of Interest) के आरोप लगाए जा रहे हैं। जानकारी के अनुसार, पंजाब सरकार ने नवंबर 2025 में LIGH नीति लागू की थी, जिसका उद्देश्य शिवालिक-कंडी बेल्ट और पीएलपीए (Punjab Land Preservation Act) से डीलिस्टेड क्षेत्रों में फार्महाउस और कम प्रभाव वाले आवासीय निर्माण को नियमित करना बताया गया था। लेकिन अब आरोप है कि नीति से लाभ मिलने वाले क्षेत्रों में वरिष्ठ अधिकारियों के परिजनों ने पहले से जमीन खरीद रखी थी। दस्तावेजों के हवाले से दावा किया गया है कि मुख्य सचिव केएपी सिन्हा के बेटे शिवम सिन्हा ने मोहाली जिले के छोटी बाड़ी नग्गल गांव में जमीन खरीदी थी, जो नीति के दायरे वाले क्षेत्र में आता है। वहीं हाउसिंग सचिव विकास गर्ग के पिता जगदीश गर्ग के नाम पर भी मोहाली के माजरी ब्लॉक स्थित स्योंक गांव में जमीन होने की बात कही गई है। हालांकि दोनों अधिकारियों ने किसी भी तरह की अनियमितता से इनकार किया है। मुख्य सचिव सिन्हा ने कहा कि उनके बेटे ने यह जमीन सात वर्ष पहले अपनी बचत से खरीदी थी और अभी तक कब्जा भी नहीं मिला है। उन्होंने आरोपों को “दुर्भावनापूर्ण अभियान” बताया। दूसरी ओर विकास गर्ग ने कहा कि उनके पिता ने अपनी निजी आय से जमीन खरीदी थी और उन्होंने नीति तैयार होने के दौरान खुद को प्रक्रिया से अलग रखने की पेशकश भी की थी। मामला तब और तूल पकड़ गया जब लुधियाना स्थित सामाजिक संगठन **पब्लिक एक्शन कमेटी (PAC)** ने नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) में याचिका दायर कर दी। याचिका में आरोप लगाया गया कि यह नीति पर्यावरणीय रूप से संवेदनशील क्षेत्रों में निर्माण गतिविधियों को बढ़ावा देती है और इससे कुछ प्रभावशाली लोगों को लाभ पहुंच सकता है। याचिका में कहा गया है कि पंजाब के पांच जिलों—एसएएस नगर, रूपनगर, नवांशहर, होशियारपुर और पठानकोट—में फैले ये क्षेत्र राज्य के लगभग 68 प्रतिशत वन क्षेत्र का हिस्सा हैं। ऐसे में बड़े पैमाने पर निर्माण गतिविधियां पर्यावरण और वन्यजीवों के लिए खतरा बन सकती हैं। एनजीटी ने मामले पर पंजाब सरकार को नोटिस जारी कर दिया है और अगली सुनवाई 21 जुलाई को तय की गई है। विपक्षी नेताओं ने भी मामले को लेकर सरकार और नौकरशाही की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं।