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"यमुना प्रदूषण पर सरकार का सख्त रुख"
चंडीगढ़: Haryana में यमुना नदी के बढ़ते प्रदूषण को रोकने के लिए हरियाणा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सख्ती बढ़ा दी है और उद्योगों को कड़े निर्देश जारी किए हैं। बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि बिना शोधन (ट्रीटमेंट) के अपशिष्ट जल को यमुना में छोड़ने पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए उद्योगों को अपने इफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ETP) को सही तरीके से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों ने कहा कि प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर नियमित निगरानी रखी जाएगी और नियमों का उल्लंघन करने पर जुर्माना व अन्य कानूनी कार्रवाई की जाएगी। एचएसपीसीबी के सभी संबंधित जिलों में वाईएपी की गतिविधियों को समय पर पूरा करने के लिए एसईई और सीईई रैंक के वरिष्ठ अधिकारियों को नोडल अधिकारी नियुक्त किया गया है। Also Read - जयपुर एयरपोर्ट पर डीआरआई टीम ने किया 3.23 करोड़ का 2.08 किलो तस्करी का सोना जब्त इसी कड़ी में आज यमुनानगर के एचएसपीसीबी के एसईई-सह-नोडल अधिकारी नवीन गुलिया की अध्यक्षता में स्थानीय औद्योगिक संगठनों के साथ जिला स्तरीय समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मेटल इंडस्ट्रीज एसोसिएशंस, बल्लारपुर पेपर मिल, सरस्वती शुगर मिल और ब्लू क्राफ्ट स्टार्च मिल सहित कई प्रमुख औद्योगिक इकाइयों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया। बैठक के दौरान नोडल अधिकारी नवीन गुलिया ने पूर्ण पर्यावरणीय अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए सभी उद्योगों के लिए चार बड़े और अनिवार्य निर्देश जारी किए। उन्होंने कहा कि जिन उद्योगों का अपशिष्ट जल डिस्चार्ज 10 केएलडी से कम है, उन्हें भी अब अनिवार्य रूप से ऑनलाइन फ्लो मीटर और पीटीजेड कैमरों से लैस रियल-टाइम ऑनलाइन मॉनिटरिंग सिस्टम लगाना होगा। उन्होंने कहा कि यमुना नदी में मिलने वाले स्थानीय नालों में कोई भी उद्योग बिना उपचारित या आधा उपचारित केमिकल या गंदा पानी नहीं बहा सकेगा। इस पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। उन्होंने कहा कि सभी औद्योगिक इकाइयों को अपने एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (ईटीपी) को लगातार और पूरी क्षमता व कुशलता के साथ चलाना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि उद्योगों को 'हजार्डस एंड अदर वेस्ट्स रूल्स' को सख्ती से लागू करते हुए खतरनाक कचरे का वैज्ञानिक भंडारण और सुरक्षित निपटान सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने बताया कि बोर्ड के इन कड़े निर्देशों पर सकारात्मक रुख अपनाते हुए बैठक में उपस्थित औद्योगिक प्रतिनिधियों और एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने नदी की सुरक्षा के लिए पूरा सहयोग देने का वादा किया है। इस कदम का उद्देश्य यमुना नदी की स्वच्छता बनाए रखना और पर्यावरण संरक्षण को सुनिश्चित करना है।