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ग्रेट निकोबार परियोजना पर जयराम रमेश का नया पत्र, पारिस्थितिकी संरक्षण पर दिया जोर
नई दिल्ली (Narendra Singh Danu) : ग्रेट निकोबार द्वीप विकास परियोजना को लेकर सियासी घमासान एक बार फिर तेज हो गया है। कांग्रेस महासचिव Jairam Ramesh ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री Bhupender Yadav को पत्र लिखकर परियोजना की पर्यावरणीय मंजूरी और प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल उठाए हैं। जयराम रमेश ने मंत्री के हालिया जवाब को “निराशाजनक” बताते हुए कहा कि परियोजना का पर्यावरण प्रभाव आकलन (EIA) अधूरा और मंत्रालय के अपने ही मानकों के खिलाफ है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार मूल सवालों का जवाब देने के बजाय पुराने तर्क दोहरा रही है। रमेश ने कहा कि नियमों के मुताबिक परियोजना की छमाही अनुपालन रिपोर्ट सार्वजनिक की जानी चाहिए, लेकिन मार्च 2024 के बाद से कोई रिपोर्ट सामने नहीं आई। साथ ही निगरानी समिति की बैठकों के रिकॉर्ड भी समय पर सार्वजनिक नहीं किए जा रहे, जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि पर्यावरण मंजूरी के तहत जरूरी संरक्षण और शमन योजनाएं, जिन्हें देश की प्रमुख संस्थाओं ने तैयार किया था, अब तक सार्वजनिक नहीं की गईं। रमेश के मुताबिक कई अहम अध्ययन अब भी लंबित हैं, जिससे यह संकेत मिलता है कि परियोजना को जल्दबाजी में मंजूरी दी गई। कांग्रेस नेता ने मूंगा चट्टानों के बड़े पैमाने पर स्थानांतरण जैसी योजनाओं को “व्यावहारिक रूप से असंभव” बताया और सरकार पर पर्यावरणीय चिंताओं को नजरअंदाज करने का आरोप लगाया। उल्लेखनीय है कि यह मामला पहले भी कई बार पत्राचार और जवाबी पत्रों के जरिए सुर्खियों में रह चुका है। सरकार का कहना है कि परियोजना राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, जबकि विपक्ष इसे पर्यावरणीय जोखिमों और पारदर्शिता की कमी से जुड़ा बड़ा मुद्दा बता रहा है।