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विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों और नागरिकों की भागीदारी से तैयार होगा ‘दिल्ली यमुना कॉम्पैक्ट’, फ्लडप्लेन और घाटों के विकास पर मंथन शुरू
नई दिल्ली (Naren Danu) : दिल्ली में यमुना नदी के बाढ़ क्षेत्र (फ्लडप्लेन) के संरक्षण, पुनर्जीवन और समग्र विकास को नई दिशा देने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने ‘यमुना डायलॉग्स’ पहल की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य विशेषज्ञों, सरकारी एजेंसियों और आम नागरिकों की सहभागिता से ‘दिल्ली यमुना कॉम्पैक्ट’ का मसौदा तैयार करना है, जो यमुना कॉरिडोर के संरक्षण, विकास और पुनर्जीवन के लिए एक व्यापक रोडमैप का काम करेगा। डीडीए के अनुसार, इस मसौदे पर सितंबर 2026 और जनवरी 2027 में आयोजित होने वाले दो बड़े ‘यमुना डायलॉग्स’ सत्रों में विस्तृत चर्चा की जाएगी। सुझावों और विचार-विमर्श के बाद इसे अंतिम रूप दिया जाएगा, ताकि यमुना नदी के संरक्षण और विकास के लिए दीर्घकालिक एवं प्रभावी नीति तैयार की जा सके। यह पहल दिल्ली के उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू के निर्देशों पर शुरू की गई है। इसके तहत पहली बार विभिन्न सरकारी संस्थानों, पर्यावरण विशेषज्ञों, वैज्ञानिकों, टाउन प्लानरों, लैंडस्केप आर्किटेक्ट्स और अन्य हितधारकों की भागीदारी के साथ स्टेकहोल्डर कंसल्टेशन वर्कशॉप आयोजित की गई। इसका उद्देश्य यमुना के संरक्षण से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर व्यापक विचार-विमर्श कर व्यावहारिक समाधान तैयार करना है। डीडीए ने बताया कि हाल ही में उपराज्यपाल संधू ने यमुना फ्लडप्लेन का दौरा कर अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की थी। इस दौरान उन्होंने नदी को स्वच्छ और पुनर्जीवित करने के लिए बहुआयामी रणनीति अपनाने के निर्देश दिए थे। उन्होंने स्पष्ट कहा था कि यमुना का संरक्षण केवल सरकारी परियोजना नहीं, बल्कि समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है और इसमें नागरिकों की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित की जानी चाहिए। पहली कार्यशाला में दो प्रमुख विषयों—फ्लडप्लेन रिस्पॉन्सिव प्लानिंग और यमुना घाटों का विकास—पर विस्तार से चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि फ्लडप्लेन में किसी भी प्रकार का विकास नदी के प्राकृतिक बाढ़ चक्र और पारिस्थितिकी तंत्र के अनुरूप होना चाहिए। वहीं, घाटों का विकास इस तरह किया जाए कि पर्यावरण संरक्षण के साथ धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन संबंधी आवश्यकताओं का भी संतुलित ध्यान रखा जा सके। डीडीए का कहना है कि ‘यमुना डायलॉग्स’ के तहत देश-विदेश के विशेषज्ञों से नदी पुनर्जीवन, नदी तट विकास, प्रकृति आधारित समाधान, जल गुणवत्ता सुधार, ड्रेनेज प्रबंधन, वित्तीय मॉडल और बेहतर प्रशासनिक व्यवस्था जैसे विषयों पर सुझाव लिए जाएंगे। इन सुझावों के आधार पर भविष्य की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। प्राधिकरण ने बताया कि आने वाले सप्ताहों में दो और स्टेकहोल्डर वर्कशॉप आयोजित की जाएंगी, जिनमें विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ अपने सुझाव देंगे। डीडीए का मानना है कि जनभागीदारी और वैज्ञानिक दृष्टिकोण के समन्वय से तैयार होने वाला ‘दिल्ली यमुना कॉम्पैक्ट’ राजधानी में यमुना नदी के संरक्षण और पुनर्जीवन की दिशा में एक महत्वपूर्ण दस्तावेज साबित होगा।