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मामले में डॉक्टर दीपांशू गुप्ता ने सभी आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि मरीज का इलाज मेडिकल प्रोटोकॉल के अनुसार किया गया था। उन्होंने दावा किया कि मरीज की स्थिति हाई ब्लड प्रेशर के कारण बिगड़ी और परिजनों को इसकी जानकारी दी गई थी। घटना के बाद पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों से बातचीत की। अधिकारियों ने मामले को शांतिपूर्ण तरीके से सुलझाने का प्रयास किया।
जगरांव (चरणजीत सिंह चन्न) : स्थानीय पटवार भवन के पास स्थित एक निजी अस्पताल के बाहर इलाज में कथित लापरवाही का गंभीर मामला सामने आया है। जगरांव के नजदीकी गांव दोलन के एक पीड़ित परिवार, ग्रामीणों और विभिन्न जथाबंदियों ने डॉक्टर दीपांशू गुप्ता के खिलाफ अस्पताल के बाहर जोरदार प्रदर्शन और नारेबाजी की। परिवार का आरोप है कि गलत इलाज और ऑपरेशन के कारण महिला मरीज की हालत नाजुक हो गई है, जो फिलहाल लुधियाना के एक अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच जंग लड़ रही है। ​क्या है पूरा मामला? ​परिजनों के गंभीर आरोप: महिला के पति हरजिंदर सिंह ने बताया कि पहले एक अन्य अस्पताल ने मरीज की गंभीर और 'हाई रिस्क' हालत को देखते हुए ऑपरेशन करने से साफ मना कर दिया था। इसके बाद वे अपनी पत्नी को डॉ. दीपांशू गुप्ता के पास लेकर आए, जिन्होंने इलाज का पूरा भरोसा दिया था। ​ऑपरेशन के बाद बिगड़ी स्थिति: परिवार का आरोप है कि सर्जरी के बाद मरीज को लंबे समय तक होश नहीं आया। जब हालत ज्यादा बिगड़ने लगी तो उन्हें मजबूरन मरीज को रेफर करवाना पड़ा। ​एम्बुलेंस में लापरवाही का दावा: परिजनों का यह भी कहना है कि मरीज को लुधियाना ले जाते समय रास्ते में एम्बुलेंस का ऑक्सीजन सिलेंडर खत्म हो गया, जिससे उसकी स्थिति और अधिक गंभीर हो गई। परिवार ने मांग की है कि मरीज के अब तक के इलाज और भविष्य के खर्चे का पूरा भुगतान अस्पताल प्रशासन करे। ​डॉक्टर ने दी सफाई: ​दूसरी ओर, डॉ. दीपांशू गुप्ता ने अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि ​मरीज का इलाज पूरी तरह से मेडिकल मानकों और प्रोटोकॉल के तहत किया गया था। ​मरीज की तबीयत अचानक 'हाई ब्लड प्रेशर' के कारण बिगड़ी थी, जिसकी जानकारी तुरंत परिजनों को दे दी गई थी। ​मरीज को सुरक्षित रेफर करने के लिए अस्पताल की तरफ से एम्बुलेंस और डॉक्टर की सुविधा भी मुहैया कराई गई थी। ​डॉक्टर के अनुसार, इलाज से पहले नियमानुसार पूरी सहमति (Consent) ली गई थी और उनके पास इस बात के तमाम दस्तावेजी सबूत और वीडियो रिकॉर्डिंग मौजूद हैं। ​पुलिस प्रशासन ने संभाला मोर्चा: ​घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी तुरंत मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों (परिवार और अस्पताल प्रबंधन) को आमने-सामने बिठाकर बातचीत की और मामले को शांतिपूर्वक सुलझाने का प्रयास किया। सूत्रों के अनुसार, अस्पताल प्रबंधन द्वारा परिवार को कुछ आर्थिक सहायता देने की पेशकश भी की गई है, हालांकि इस बात की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।