इनेलो के प्रदेश प्रवक्ता ओंकार सिंह ने टांगरी नदी को अंबाला छावनी की सबसे गंभीर समस्या बताते हुए सरकार से स्थायी समाधान की मांग की है। उन्होंने कहा कि हर साल अस्थायी उपायों पर करोड़ों रुपये खर्च किए जाते हैं, लेकिन तटबंध, डी-सिल्टिंग और पुनर्वास की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई। उन्होंने बाढ़ नियंत्रण की समयबद्ध कार्ययोजना सार्वजनिक करने की मांग की।
अंबाला ( जगदीप सिंह ) : हर साल करोड़ों रुपये के अस्थायी इंतजाम क्यों? टांगरी पर स्थायी तटबंध, डी-सिल्टिंग और बाढ़ प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की ठोस योजना क्यों नहीं।
इनेलो के प्रदेश प्रवक्ता ओंकार सिंह ने कहा कि टांगरी नदी अम्बाला छावनी तथा आसपास के ग्रामीण एवं औद्योगिक क्षेत्रों के लिए वर्षों से गंभीर समस्या बनी हुई है। जुलाई 2023 की भयंकर बाढ़ में भारी तबाही हुई और वर्ष 2025 में भी बाढ़ की स्थिति ने सरकार के बाढ़ नियंत्रण के दावों की पोल खोल दी। इसके बावजूद आज तक टांगरी नदी का कोई स्थायी समाधान नहीं किया गया।
उन्होंने कहा कि 7 बार के विधायक और 3 बार के मंत्री रहे अनिल विज के लंबे राजनीतिक एवं प्रशासनिक अनुभव के बावजूद अम्बाला छावनी की यह सबसे गंभीर समस्या जस की तस बनी हुई है। सवाल यह है कि इतने वर्षों तक सत्ता में प्रभावशाली भूमिका रहने के बावजूद टांगरी नदी पर स्थायी तटबंध, नदी की सफाई और जल निकासी की वैज्ञानिक व्यवस्था क्यों नहीं बनाई गई? ओंकार सिंह ने कहा कि टांगरी नदी के आसपास बसे लोगों की स्थिति बेहद चिंताजनक है। थोड़ी सी तेज बारिश होते ही नदी का जलस्तर बढ़ने लगता है और टांगरी के बहाव क्षेत्र में रहने वाले परिवारों की सांसें फूलने लगती हैं। लोगों को हर मानसून में यह डर सताता है कि पानी उनके घरों और दुकानों में न घुस जाए। यह स्थिति किसी भी संवेदनशील सरकार के लिए गंभीर चिंता का विषय होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार हर वर्ष अस्थायी बांध, मिट्टी डालने और बाढ़ रोकने के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च करती है, लेकिन अगली बारिश में फिर वही समस्या सामने खड़ी हो जाती है। अस्थायी इंतजामों पर बार-बार पैसा खर्च करने के बजाय सरकार को स्थायी समाधान की दिशा में काम करना चाहिए। अम्बाला छावनी को बाढ़ से बचाने के लिए सरकार से मांग करते हुए कहा कि टांगरी नदी के वास्तविक बहाव क्षेत्र की वैज्ञानिक पैमाइश करवाई जाए और राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज भूमि की पूरी स्थिति सार्वजनिक की जाए। नदी के दोनों किनारों पर मजबूत एवं ऊंचे स्थायी तटबंध बनाए जाएं, ताकि पानी रिहायशी और औद्योगिक क्षेत्रों में प्रवेश न कर सके। टांगरी नदी की वैज्ञानिक तरीके से डी-सिल्टिंग और नियमित सफाई के लिए स्थायी वार्षिक कार्ययोजना बनाई जाए। नदी की खुदाई से निकलने वाली मिट्टी को इधर-उधर भेजने अथवा बेचने के बजाय, जहां तकनीकी रूप से उपयुक्त हो, इसी मिट्टी का इस्तेमाल तटबंधों के निर्माण में किया जाए। इससे सरकारी धन की बचत भी होगी और बाढ़ नियंत्रण का स्थायी ढांचा भी तैयार होगा। वर्ष 2023 और 2025 की बाढ़ के बाद हुए नुकसान तथा विशेषज्ञों/समितियों की सिफारिशों को सार्वजनिक किया जाए और बताया जाए कि उन पर अब तक क्या कार्रवाई हुई।
टांगरी के बहाव क्षेत्र में वर्षों से रह रहे परिवारों को जबरन उजाड़ने के बजाय उचित पुनर्वास एवं वैकल्पिक आवास की ठोस नीति बनाई जाए। टांगरी से सटे औद्योगिक क्षेत्रों के लिए अलग बाढ़ सुरक्षा योजना तैयार की जाए, ताकि उद्योगों, मजदूरों और करोड़ों रुपये की मशीनरी को भविष्य में होने वाले नुकसान से बचाया जा सके। सरकार विधानसभा में यह स्पष्ट करे कि स्थायी समाधान के लिए कितनी राशि खर्च होगी और काम किस निश्चित तारीख तक पूरा किया जाएगा। ओंकार सिंह ने कहा कि विधानसभा में इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाकर सरकार से केवल आश्वासन नहीं बल्कि खर्च का पूरा हिसाब, अब तक की कार्रवाई और स्थायी समाधान की निश्चित समय-सीमा मांगी जाएगी।
उन्होंने कहा, “अम्बाला छावनी के लोगों को हर बरसात में भगवान भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। टांगरी नदी कोई नई समस्या नहीं है। वर्षों से सत्ता में बैठे लोगों ने यदि समय रहते इसका स्थायी समाधान किया होता तो आज हजारों परिवारों को बारिश शुरू होते ही डर के साए में नहीं जीना पड़ता।” उन्होंने कहा कि सरकार को अब राजनीति से ऊपर उठकर टांगरी नदी का वैज्ञानिक, स्थायी और समयबद्ध समाधान करना चाहिए, ताकि अम्बाला छावनी के लोगों को हर मानसून में बाढ़ की चिंता से मुक्ति मिल सके।