बराड़ा क्षेत्र के गांव कम्बास में स्थित प्राचीन शिव मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है। स्थानीय मान्यताओं के अनुसार यहां स्थापित शिवलिंग स्वयं प्रकट हुआ था। सावन और महाशिवरात्रि के दौरान मंदिर में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है। यह मंदिर धार्मिक आस्था के साथ-साथ गांव की सांस्कृतिक विरासत और पहचान का भी प्रतीक है।
बराड़ा (अमरिंदर सिंह) : बराड़ा क्षेत्र के गांव कम्बास में स्थित प्राचीन शिव मंदिर वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर की विशेष पहचान यहां विराजमान शिवलिंग से जुड़ी स्थानीय मान्यता है, जिसे श्रद्धालु स्वयं प्रकट शिवलिंग के रूप में पूजते हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार मंदिर का इतिहास आजादी से पहले का बताया जाता है। समय के साथ मंदिर केवल गांव ही नहीं, बल्कि आसपास के क्षेत्रों के श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था का भी प्रमुख केंद्र बन गया। प्रतिदिन यहां भगवान शिव के दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए श्रद्धालु पहुंचते हैं।मंदिर की प्राचीनता और स्वयं प्रकट शिवलिंग से जुड़ी मान्यता श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखती है। लोगों का विश्वास है कि सच्चे मन से भगवान शिव की आराधना करने पर उनकी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था के साथ भक्त मंदिर पहुंचकर अपने परिवार की सुख-शांति और क्षेत्र की खुशहाली की कामना करते हैं।विशेष रूप से सावन माह और महाशिवरात्रि के अवसर पर मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ जाती है। इन अवसरों पर दूर-दराज के क्षेत्रों से भी शिव भक्त दर्शन और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, जिससे पूरा वातावरण शिवमय हो उठता है।कम्बास गांव के लोगों के लिए यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि उनकी पुरानी विरासत और सांस्कृतिक पहचान का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है। पीढ़ियों से चली आ रही आस्था आज भी इस मंदिर से लोगों को जोड़े हुए है।कम्बास का प्राचीन शिव मंदिर आज भी इतिहास और आस्था के संगम के रूप में अपनी अलग पहचान बनाए हुए है, जहां श्रद्धा के साथ पहुंचने वाले हर भक्त के मन में भगवान शिव के प्रति अटूट विश्वास दिखाई देता है