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दुनिया से जाने वाले चले जाते हैं कहाँ…
सुरीले सफ़र में आगे बढ़ता रहा कारवां
चंडीगढ़ के मेयर सौरभ जोशी सहित कई वशिष्ट अथिति रहे मौजूद
चंडीगढ़ 07 Feb : संगीत की अमर धुनों और भावनाओं से सजी शाम ने टैगोर थिएटर, सेक्टर-18 चंडीगढ़ को यादों की महफ़िल में बदल दिया, जब ‘सुरीला सफ़र 2026’ के मंच से सदाबहार गीतों की गूंज उठी। यह संगीतमय संध्या श्री ओ.पी. राघव की पुण्य स्मृति को समर्पित रही, जिसमें संगीत के ज़रिये प्रेम, विरह और जीवन के हर रंग को जीवंत किया गया। कार्यक्रम का आयोजन रामपाल राघव के संयोजन में किया गया। इस अवसर पर वरिष्ठ नागरिक से लेकर 40 गायकों ने प्रस्तुति दी जिनमें शामिल रहे सीनियर सिटीज़न बी.डी. शर्मा ; एच सी एस जगदीप ढांडा,राधिका ग्रोवर, संजीव कुमार आदि । मंच पर बच्चों नवरीत और मिष्टी की प्रस्तुति ने दर्शकों का विशेष मन मोह लिया। इस संगीतमय कारवां में करीब 40 गायकों ने हिस्सा लिया और “एक प्यार का नग़मा है”, “दुनिया से जाने वाले चले जाते हैं कहाँ”, “ओ जाने वाले हो सके तो लौट के आना” जैसे कालजयी गीतों से श्रोताओं को भावुक कर दिया। हर गीत के साथ तालियों की गूंज और आँखों में नमी साफ़ झलक रही थी। कार्यक्रम की सूत्रधार शैली तनेजा ने पूरी शाम को सधे और भावपूर्ण अंदाज़ में पिरोए रखा। वहीं संगीत संयोजन डॉ. अरुण कांत का रहा, जिनकी संगीतात्मक समझ ने प्रस्तुतियों को और ऊंचाई दी। ए.आर. मेलोडीज़ एसोसिएशन के सहयोग से आयोजित यह कार्यक्रम न सिर्फ़ एक संगीतमय श्रद्धांजलि था, बल्कि यह संदेश भी दे गया कि संगीत के माध्यम से यादें कभी विदा नहीं होतीं—वह बस एक सुर से दूसरे सुर तक सफ़र करती रहती हैं। सच ही कहा गया— दुनिया से जाने वाले चले जाते हैं कहाँ… वे सुरों में, गीतों में और दिलों में हमेशा ज़िंदा रहते हैं।